मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को चार साल के भीतर दूसरा बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 6 लोकसभा सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिससे राज्य में राजनीतिक समीकरणों के फिर से बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं।
Politics: 6 सांसद बागी, राउत बोले- ये फूट नहीं, खुद को बेचने का सौदा है
शिवसेना (UBT) में 6 सांसदों की बगावत पर संजय राउत का बड़ा हमला। इसे फूट नहीं, बल्कि मंत्री पद के लिए 'सौदा' बताया।
HIGHLIGHTS
- शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी है।
- सांसद संजय राउत ने इस घटना को 'फूट नहीं, बल्कि खुद को बेचने का सौदा' करार दिया है।
- राउत ने दावा किया कि बागी सांसदों में मंत्री पद को लेकर विवाद है और एक को मंत्री पद व बाकी को 25 करोड़ का मुआवजा मिलेगा।
- बीजेपी नेता गिरीश महाजन ने संजय राउत को उद्धव ठाकरे के लिए 'मानव बम' बताया है।
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हालांकि, बागी सांसदों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य प्रवक्ता और सांसद संजय राउत ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए इसे एक राजनीतिक 'सौदा' करार दिया है।
'यह फूट नहीं, सौदा है' - संजय राउत
संजय राउत ने इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी में फूट मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब कोई विचारधारा के लिए पार्टी छोड़ता है, तो उसे फूट कहा जाता है।
लेकिन जब कोई खुद को बाजार में बेच दे और कोई उसे खरीद ले, तो यह एक सौदा होता है। राउत ने आरोप लगाया कि इन सांसदों ने किसी बड़े सिद्धांत या विचार के लिए पार्टी नहीं छोड़ी है।
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"कोई व्यक्ति विचारधारा के लिए पार्टी छोड़ता है तो उसे फूट कहा जा सकता है, लेकिन जब कोई खुद को बाजार में बेचने के लिए खड़ा कर दे और कोई उसे खरीद ले, तो उसे फूट नहीं बल्कि सौदा कहा जाता है।"
उन्होंने कहा कि दो दिन पहले उनकी पार्टी के 6 सांसदों ने खुद को राजनीतिक बाजार में पेश किया और फिर उनकी बोली लगाकर उन्हें खरीद लिया गया।
मंत्री पद को लेकर खींचतान का दावा
संजय राउत ने एक और सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि बागी गुट में मंत्री पद को लेकर भारी खींचतान चल रही है। उनके अनुसार, हर बागी सांसद केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह चाहता है, जिससे उनके बीच विवाद पैदा हो गया है।
25 करोड़ का 'मुआवजा'?
राउत ने दावा किया कि इस विवाद को सुलझाने के लिए देर रात एक समझौता किया गया। उन्होंने कहा, "इसका समाधान यह निकला है कि सिर्फ एक बागी को मंत्री पद मिलेगा और बाकी पांच को मुआवजे के तौर पर अतिरिक्त 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे, बशर्ते वे कोई हंगामा न खड़ा करें।"
हालांकि, यह संजय राउत का दावा है और इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल और बढ़ा दी है।
बीजेपी का पलटवार: 'राउत हैं मानव बम'
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी संजय राउत पर निशाना साधा है। महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री और बीजेपी नेता गिरीश महाजन ने राउत पर कटाक्ष करते हुए उन्हें 'मानव बम' की संज्ञा दी।
महाजन ने कहा कि संजय राउत की वजह से ही उद्धव ठाकरे की पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, "उद्धव ने उन्हें अपने गले में बांध रखा है और इसका खामियाजा उनकी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है।"
देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाने वाले महाजन ने यह भी कहा कि उन्होंने कई बार उद्धव ठाकरे को संजय राउत पर लगाम लगाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।
शिवसेना में चार साल में दूसरी बड़ी टूट
यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना को इस तरह की बगावत का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 2022 में एकनाथ शिंदे ने 40 से अधिक विधायकों के साथ बगावत कर दी थी, जिससे उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी।
अब लोकसभा सांसदों की यह बगावत पार्टी के लिए एक और बड़ा झटका है। इससे पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव और भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फिलहाल, सभी की निगाहें बागी सांसदों के अगले कदम पर टिकी हैं। उनके आधिकारिक बयान के बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो पाएगी। यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।
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