नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) केंद्र में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने एनडीए को उस दो-तिहाई बहुमत के करीब ला दिया है, जो संविधान में बड़े बदलाव करने के लिए आवश्यक है।
बहुमत का खेल: NDA दो-तिहाई बहुमत के करीब, विपक्ष में टूट से बदले समीकरण
TMC और शिवसेना UBT में टूट के बाद NDA की ताकत बढ़ी, संविधान संशोधन का रास्ता हो सकता है साफ।
HIGHLIGHTS
- विपक्षी दलों में टूट से लोकसभा में एनडीए की ताकत लगातार बढ़ रही है।
- तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के बागी होने से समीकरण बदल गए हैं।
- राज्यसभा में भी एनडीए दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े 163 के करीब पहुंच रहा है।
- संविधान में संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
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लोकसभा में बढ़ रही एनडीए की ताकत
विपक्षी खेमे में बड़ी टूट से लोकसभा में एनडीए की ताकत में इजाफा हुआ है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 सांसदों ने बागी होकर एनसीपीआई में विलय कर लिया है। इन सांसदों ने सदन में एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे सत्ता पक्ष का संख्या बल और बढ़ गया है।
शिवसेना UBT में भी टूट की अटकलें
वहीं, उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) में भी बड़ी टूट की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के 6 सांसद जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो लोकसभा में एनडीए की स्थिति और भी मजबूत हो जाएगी।
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राज्यसभा में बहुमत का गणित
लोकसभा की तुलना में राज्यसभा में एनडीए का रास्ता ज्यादा आसान दिख रहा है। वर्तमान में, उच्च सदन में एनडीए के पास 148 सदस्य हैं। चल रहे चुनावों के बाद यह संख्या बढ़कर 151 तक पहुंचने की उम्मीद है, जो बहुमत के लिए एक आरामदायक स्थिति है।
जानकारों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों में टूट का यह सिलसिला जारी रहा, तो सरकार के लिए विवादास्पद संशोधन पारित कराना भी आसान हो जाएगा।
दो-तिहाई बहुमत से कुछ कदम दूर
रिपोर्टों के अनुसार, टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर होने वाले उपचुनाव में एनडीए को जीत मिल सकती है। इससे गठबंधन की ताकत 154 हो जाएगी। यह 245 सदस्यीय सदन में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े 163 से सिर्फ नौ सीटें कम होगी। समाजवादी पार्टी में भी संभावित टूट की चर्चा है, जो एनडीए के पक्ष में जा सकती है।
क्यों अहम है दो-तिहाई बहुमत?
सदन में सामान्य विधेयक साधारण बहुमत से पारित हो जाते हैं, लेकिन संविधान में संशोधन से जुड़े विधेयकों के लिए दोनों सदनों में कुल सदस्यों के बहुमत के साथ-साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है।
इन राजनीतिक बदलावों से स्पष्ट है कि एनडीए अपनी विधायी शक्ति को बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि गठबंधन दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लेता है, तो यह सरकार को अपने एजेंडे को और मजबूती से लागू करने में सक्षम बनाएगा, जिससे भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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