नई दिल्ली | सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। घरेलू वायदा और हाजिर दोनों बाजारों में कीमती धातुओं के भाव दबाव में कारोबार करते दिखे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर आक्रामक रुख अपनाने के संकेतों के बाद यह गिरावट आई है।
सोना-चांदी धड़ाम! भारी गिरावट: सोने की कीमतों में भारी गिरावट, जानें आज का ताजा भाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
HIGHLIGHTS
- गुरुवार को 24 कैरेट सोने का हाजिर भाव 816 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर गया।
- चांदी की कीमत में 3,988 रुपये प्रति किलोग्राम की भारी गिरावट दर्ज की गई।
- MCX पर सोने का वायदा भाव 2200 रुपये से ज्यादा टूटकर 1,51,660 रुपये पर आ गया।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के कारण कीमतों पर दबाव बना है।
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सोने और चांदी के हाजिर भाव में बड़ी गिरावट
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, गुरुवार सुबह 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने का हाजिर भाव 816 रुपये की बड़ी गिरावट के साथ 1,49,332 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
इसी तरह, 22 कैरेट सोने की कीमत 748 रुपये घटकर 1,36,788 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। वहीं, 18 कैरेट सोने का भाव 612 रुपये की गिरावट के साथ 1,11,999 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। IBJA के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी का हाजिर भाव 3,988 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2,43,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था।
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वायदा बाजार में भी नरमी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव दिखा। गुरुवार दोपहर को सोने का वायदा भाव 1.44% या 2219 रुपये की गिरावट के साथ 1,51,660 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था।
वहीं, चांदी का वायदा भाव 2.56% या 6757 रुपये की बड़ी गिरावट के साथ 2,45,350 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा था।
क्यों गिरे सोने के दाम?
सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का नीतिगत रुख है। फेड ने बुधवार को अपनी बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन भविष्य में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।
फेड ने कहा कि वह महंगाई पर नजर बनाए हुए है।
फेड का यह आक्रामक (हॉकिश) रुख डॉलर को मजबूती देता है और सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्ति पर दबाव डालता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड जैसे विकल्पों में निवेश करना पसंद करते हैं, जहां उन्हें निश्चित रिटर्न मिलता है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक महंगाई को लेकर चिंताएं बनी रहेंगी और फेड का रुख सख्त रहेगा, तब तक सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। यह गिरावट निवेशकों के लिए एक अवसर भी हो सकती है, लेकिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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