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भारत

डीजल, ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी: डीजल, ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, जानें आप पर क्या होगा असर

बलजीत सिंह शेखावत

वित्त मंत्रालय ने डीजल और ATF पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) बढ़ा दी है। यह फैसला तब आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें घट रही हैं।

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HIGHLIGHTS

  • डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 13.5 रुपये से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर की गई।
  • एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ड्यूटी 9.5 रुपये से बढ़कर 12.5 रुपये प्रति लीटर हुई।
  • यह बढ़ोतरी पिछले दो हफ्तों की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर की गई है।
  • यूएस-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल की मौजूदा कीमतें 80 डॉलर के करीब आ गई हैं।
export duty hiked on diesel atf amid falling crude prices

नई दिल्ली | वित्त मंत्रालय ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की घोषणा की है। ये नई दरें मंगलवार से प्रभावी हो गई हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का रुख बना हुआ है।

सरकार के इस फैसले के बाद डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 13.5 रुपये से बढ़कर 14 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

इसी तरह, ATF पर लगने वाली ड्यूटी को 9.5 रुपये से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, पेट्रोल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्यों बढ़ाई गई एक्सपोर्ट ड्यूटी?

इस बढ़ोतरी के पीछे की वजह को समझना जरूरी है। यह एक्सपोर्ट ड्यूटी, जिसे स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) भी कहा जाता है, हर 15 दिनों में संशोधित की जाती है।

इसका निर्धारण पिछले दो हफ्तों की अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के औसत के आधार पर होता है। चूंकि पिछले पखवाड़े में कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, इसलिए इस बार ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है।

यह बढ़ोतरी पिछले दो हफ्तों की औसत कीमतों पर आधारित है, न कि मौजूदा घटती कीमतों पर।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का हाल

दूसरी ओर, यूएस-ईरान के बीच शांति समझौते की संभावनाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी जा रही है।

मंगलवार को WTI क्रूड 80.68 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 82.95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कुछ हफ्ते पहले यही कीमतें 95 डॉलर के स्तर पर थीं।

घरेलू बाजार पर क्या होगा असर?

यह ड्यूटी केवल तेल के निर्यात पर लगाई जाती है। इसका सीधा असर देश में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर नहीं पड़ता है।

यह कदम तेल कंपनियों द्वारा अर्जित अप्रत्याशित लाभ (windfall profits) को नियंत्रित करने के लिए उठाया जाता है। भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट के कारण अलग-अलग शहरों में भिन्न होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यूएस-ईरान डील सफल होती है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में SAED में कटौती की जा सकती है। फिलहाल, घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

*Edit with Google AI Studio

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