नई दिल्ली | देश में अगले कुछ महीनों में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में राष्ट्रीय स्तर पर बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जी-7 शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा अपनी नई टीम की घोषणा कर सकते हैं।
बीजेपी में बड़ा फेरबदल!: नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान जल्द, चुनावी राज्यों पर फोकस
पीएम मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा हो सकती है। फोकस आगामी विधानसभा चुनावों वाले राज्यों पर है।
HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी के जी-7 दौरे से लौटने के बाद ऐलान संभव।
- नई टीम में 11 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 6 महासचिव होंगे।
- उत्तर प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड के नेताओं को मिल सकती है तरजीह।
- राजनाथ सिंह के आवास पर बीजेपी-आरएसएस की 4 घंटे चली बैठक।
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नड्डा की नई टीम में चुनावी राज्यों का दिखेगा दबदबा
सूत्रों के मुताबिक, जेपी नड्डा की नई टीम में उन राज्यों को विशेष महत्व दिया जाएगा जहां निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने हैं।
अगले साल उत्तर प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड में चुनाव होने हैं। इसलिए इन राज्यों के नेताओं को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर बीजेपी चुनावी समीकरण साधने की कोशिश करेगी।
इसके अलावा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पर भी पार्टी का ध्यान केंद्रित है, जहां 2028 में चुनाव होने हैं। इन राज्यों के नेताओं को भी संगठन में महत्वपूर्ण पद मिल सकते हैं।
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सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर
पार्टी नेतृत्व नई टीम में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। बताया जा रहा है कि नई टीम में 11 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 6 राष्ट्रीय महासचिव शामिल होंगे।
इस फेरबदल में महिलाओं, विभिन्न जातीय समूहों, युवाओं और अनुभवी नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व दिए जाने की पूरी संभावना है ताकि पार्टी हर वर्ग तक अपनी पहुंच मजबूत कर सके।
देर रात तक चली शाह-नड्डा और RSS की बैठक
इस संगठनात्मक फेरबदल को लेकर हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। यह बैठक करीब चार घंटे तक चली।
बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और आरएसएस के वरिष्ठ नेता अरुण कुमार और शिव प्रकाश भी मौजूद थे। इस दौरान संगठनात्मक बदलावों समेत कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन में बदलाव के साथ-साथ राज्यपालों की नियुक्तियों और केंद्र सरकार में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते हैं।
यह फेरबदल न केवल आगामी विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए भी पार्टी की रणनीति की नींव रखेगा। नई टीम के सामने चुनौतियों के साथ-साथ अपनी क्षमता साबित करने का बड़ा अवसर होगा।
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