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राजनीति

भाजपा-कांग्रेस में तीखी जुबानी जंग: राहुल गांधी के कोटा दौरे पर राजस्थान की सियासत गरमाई

बलजीत सिंह शेखावत
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rajasthan politics heats up over rahul gandhis visit to kota

कोटा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बुधवार को राजस्थान दौरे के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। खासतौर पर कोटा में नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ उनके संवाद को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जबकि कांग्रेस ने केंद्र सरकार को परीक्षा व्यवस्था और बार-बार होने वाली परीक्षाओं के रद्द होने के मुद्दे पर घेरा।

दिया कुमारी ने बताया राजनीतिक स्टंट

राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने राहुल गांधी के कोटा दौरे को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के दौरान भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक का नया और शर्मनाक रिकॉर्ड बना था, लेकिन उस समय राहुल गांधी ने युवाओं के समर्थन में एक शब्द भी नहीं कहा।

उन्होंने कहा, "गहलोत सरकार के कार्यकाल में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रहीं, लेकिन राहुल गांधी तब पूरी तरह मौन रहे। अब छात्रों के बीच जाकर राजनीति करना केवल दिखावा है।"

दिया कुमारी ने भरोसा दिलाया कि वर्तमान सरकार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित करेगी और यदि किसी परीक्षा का पुनः आयोजन होगा तो वह निष्पक्ष तरीके से कराया जाएगा।

राजेंद्र राठौड़ का कांग्रेस पर हमला

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने भी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पांच साल के शासनकाल में राजस्थान में 19 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिससे लाखों युवाओं के सरकारी नौकरी के सपने प्रभावित हुए।

राठौड़ ने कहा, "इतनी बड़ी संख्या में पेपर लीक होने के बावजूद दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उस दौरान राहुल गांधी ने अपनी ही सरकार से कोई सवाल नहीं पूछा। आज युवाओं की चिंता जताना केवल राजनीतिक अवसरवाद है।"

कांग्रेस का पलटवार

वहीं कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा समय में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में लगातार खामियां सामने आ रही हैं और कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ रही हैं। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में विफल रही है, जिसके कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

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