माउंट आबू | आजादी के 79 साल बाद राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू के पास बसे उत्तरज गांव में आखिरकार बिजली पहुंचने का सपना सच होने जा रहा है। यह संभव हुआ है ग्रामीणों के उस अदम्य साहस से, जहां उन्होंने सरकारी मशीनरी की सीमाओं को तोड़ते हुए खुद कंधों पर भारी-भरकम ट्रांसफार्मर ढोया।
कंधों पर बिजली, 79 साल का अंत: 79 साल बाद बिजली, ग्रामीणों ने कंधों पर उठाया ट्रांसफार्मर
माउंट आबू के पास उत्तरज गांव में ग्रामीणों ने खुद कंधों पर ट्रांसफार्मर पहुंचाकर 79 साल का अंधेरा मिटाया।
HIGHLIGHTS
- आजादी के 79 साल बाद माउंट आबू के उत्तरज गांव में बिजली पहुंचेगी।
- दुर्गम रास्ते के कारण ग्रामीणों ने कंधों पर भारी ट्रांसफार्मर पहुंचाया।
- यह गांव अरावली की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से 6 किमी दूर है।
- वन्यजीव अभयारण्य के नियमों के कारण सड़क बनाना संभव नहीं था।
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कंधों पर ढोया ट्रांसफार्मर, रचा इतिहास
उत्तरज गांव तक पहुंचना बेहद दुर्गम है। चारों तरफ विशाल पत्थर और खड़ी चढ़ाई होने के कारण यहां भारी मशीनरी ले जाना लगभग नामुमकिन था।
बिजली विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती ट्रांसफार्मर (डीपी) को गांव तक पहुंचाना था, जो इस काम में मुख्य बाधा बन रही थी।
इस मुश्किल को देखते हुए गांव के हीर सिंह और नरपत सिंह समेत दो दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया।
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उन्होंने मजबूत बल्लियों और रस्सियों के सहारे भारी ट्रांसफार्मर को अपने कंधों पर उठाया और मीलों का जोखिम भरा सफर तय किया।
घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद जब ट्रांसफार्मर गांव पहुंचा, तो हर किसी के चेहरे पर दशकों का इंतजार खत्म होने की खुशी साफ झलक रही थी।
"अब उजाले में बीतेगा भविष्य"
जैसे ही बिजली का ट्रांसफार्मर गांव की सीमा में पहुंचा, पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल हो गया। लोगों ने पारंपरिक लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों के साथ इस ऐतिहासिक पल का स्वागत किया।
गांव के एक प्रबुद्ध नागरिक सोहन सिंह ने भावुक होकर कहा, "हमने और हमारे पूर्वजों ने पूरी जिंदगी ढिबरी और लालटेन की रोशनी में गुजार दी। हमारे बच्चे रात में ठीक से पढ़ नहीं पाते थे। अब हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य उजाले में होगा।"
अब तक गांव के लोगों को मोबाइल चार्ज करने जैसी छोटी जरूरत के लिए भी कई किलोमीटर पैदल चलकर नीचे जाना पड़ता था।
बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के काम बुरी तरह प्रभावित होते थे, लेकिन अब यह सब बदलने वाला है।
क्यों हुई 79 साल की देरी?
इस गांव के विकास में तीन बड़ी भौगोलिक चुनौतियां हमेशा आड़े आईं। पहली, गुरु शिखर के पास खड़ी चढ़ाई वाला कच्चा रास्ता, जहां वाहन नहीं जा सकते।
दूसरा, यह पूरा इलाका माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य के तहत आता है, जहां निर्माण और पेड़ों की कटाई पर सख्त कानूनी प्रतिबंध हैं।
तीसरा, रास्ते में मौजूद विशाल ग्रेनाइट पत्थरों को बिना विस्फोट के हटाना संभव नहीं था, जिसकी अनुमति प्रशासन नहीं दे सकता था।
अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) के अधिकारियों ने भी ग्रामीणों के इस जज्बे को सलाम किया है। विभाग ने कहा कि ग्रामीणों ने उनकी सबसे बड़ी मुश्किल हल कर दी है। अब जल्द ही तार खींचकर और मीटर लगाकर 15 जून के बाद गांव को ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा, जिससे 79 साल का अंधेरा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
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