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राजस्थान

सहकारिता विभाग का मास्टर प्लान: राजस्थान: सहकारिता से आएगी समृद्धि, जल्द बनेंगे नए गोदाम

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान में सहकारिता विभाग ने गोदाम निर्माण और नई पैक्स समितियों के गठन के लिए समय सीमा तय की है।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान के सभी ग्राम पंचायतों में 31 मई तक नई पैक्स समितियों के गठन का लक्ष्य रखा गया है।
  • विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत 500, 250 और 100 मीट्रिक टन के गोदाम बनेंगे।
  • सहकारिता विभाग में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की गई है।
  • किसानों की मदद के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर्स की स्थापना और कृषि उपकरणों की खरीद तेज होगी।
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जयपुर | राजस्थान सरकार प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सहकारिता के क्षेत्र में बड़े बदलाव करने जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप अब सहकारी समितियों को अधिक सशक्त और पारदर्शी बनाया जाएगा।

सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार डॉ. समित शर्मा ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक में विभाग की भविष्य की योजनाओं का खाका खींचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा।

विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना पर जोर

डॉ. समित शर्मा ने शासन सचिवालय में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में निर्मित हो रहे गोदामों का कार्य गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए।

इन गोदामों का समुचित उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हो सके। भंडारण क्षमता बढ़ने से किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सकेगा।

गोदाम निर्माण की समय सीमा और क्षमता

बैठक में विश्व की वृहत् अन्न भण्डारण योजना के अंतर्गत 500 मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों के निर्माण की प्रगति जांची गई। साथ ही 250 और 100 मीट्रिक टन के गोदामों पर भी चर्चा हुई।

शासन सचिव ने निर्देश दिए कि इन गोदामों की शीघ्र स्वीकृति जारी करवाकर निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। भूमि आवंटन से जुड़े लंबित प्रकरणों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा गया।

नई पैक्स समितियों का गठन और लक्ष्य

ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और खाद-बीज की पहुंच आसान बनाने के लिए नई पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां) का गठन किया जा रहा है। जिन पंचायतों में पैक्स नहीं है, वहां काम तेज होगा।

डॉ. शर्मा ने निर्देश दिए कि 31 मई तक सभी पैक्सविहीन ग्राम पंचायतों में नई समितियां स्वीकृत की जाएं। इसके बाद 20 जून तक इनका विधिवत पंजीयन भी सुनिश्चित करना होगा।

डिजिटलीकरण से आएगी कामकाज में पारदर्शिता

सहकारी समितियों के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए पैक्स कम्प्यूटराइजेशन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अब लेनदेन संबंधित सभी कार्य ऑनलाइन माध्यम से ही किए जाएंगे।

जब सभी रिकॉर्ड डिजिटल होंगे, तो समितियों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी। इससे किसानों का भरोसा सहकारी संस्थाओं पर और अधिक बढ़ेगा और भ्रष्टाचार की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।

कस्टम हायरिंग सेंटर्स और आधुनिक खेती

किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर्स की स्थापना की जा रही है। डॉ. शर्मा ने कहा कि इन सेंटर्स पर उपलब्ध उपकरणों की सुरक्षा और उपयोग सुनिश्चित हो।

खास बात यह है कि उपकरणों की खरीद गांव की आवश्यकता के अनुरूप ही की जाएगी। इसके लिए ग्रामीणों और किसानों से चर्चा की जाएगी ताकि उनकी जरूरत के हिसाब से मशीनें खरीदी जा सकें।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति

शासन सचिव ने विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग में पारदर्शी कार्य संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया गया।

भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। सभी अधिकारी-कर्मचारी समय पर कार्यालय आएं और पूरे समय उपस्थित रहकर जनता की समस्याओं का समाधान करें।

अब सभी कार्मिकों को अनिवार्य रूप से आधार इनेबल्ड बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इससे कार्यस्थल पर अनुशासन बना रहेगा और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलेगा।

सहकार से समृद्धि की ओर बढ़ता राजस्थान

राजस्थान आज विश्व की वृहत् अन्न भण्डारण योजना और नवीन एम-पैक्स के गठन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। यह विभाग की सक्रियता और सरकार की नीतियों का ही परिणाम है।

डॉ. शर्मा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों की सराहना की, लेकिन खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों को फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा कि निष्क्रिय समितियों को जल्द से जल्द सक्रिय किया जाना चाहिए।

डेयरी समितियों और माइक्रो एटीएम का विस्तार

सहकारी बैंकों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डेयरी समितियों के खाते सहकारी बैंकों में खोले जाएंगे। साथ ही डेयरी समितियों को बैंक मित्र बनाकर माइक्रो एटीएम वितरित किए जाने की भी योजना है।

इन माइक्रो एटीएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं घर-घर तक पहुंच सकेंगी। इसके अलावा समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में भी उन्नत किया जाएगा ताकि अन्य सेवाएं मिल सकें।

सहकारिता विभाग के ये कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होंगे, बल्कि राजस्थान को सहकारिता के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करेंगे। इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही ग्रामीण विकास की असली कुंजी है।

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