रेवदर |अर्बुदारण्य की पावन धरा पर स्थित श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की ओर से नंदगांव में आयोजित ‘श्री सुरभि हरिहर चातुर्मास आराधना महोत्सव’ में पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती महाराज ने रामकथा के आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश डाला।
रामकथा के दिव्य रहस्य: शंकराचार्य ने खोले रामकथा के आध्यात्मिक रहस्य
नंदगांव में जगद्गुरु शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती ने रामकथा को जीवात्मा की परमात्मा तक की यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि 'मैं और मेरा' का भाव ही संसार का बंधन है।
HIGHLIGHTS
- जगद्गुरु शंकराचार्य ने रामकथा को जीवात्मा की परमात्मा तक की आंतरिक यात्रा बताया।उन्होंने कहा कि 'मैं और मेरा' का भाव ही मनुष्य को संसार के बंधनों में बांधता है।आध्यात्मिक दृष्टि से शरीर को अयोध्या और जीवात्मा को दशरथ का प्रतीक माना गया है।नंदगांव में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज का वर्धन्ती दिवस मनाया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि रामकथा केवल भगवान श्रीराम के जीवन की कथा नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक जीवात्मा की परमात्मा तक पहुंचने वाली एक गहन आंतरिक यात्रा का वर्णन है।
रामकथा: जीवात्मा की आंतरिक यात्रा
जगद्गुरु शंकराचार्य ने भारतीय दर्शन के अनुसार शरीर की संरचना और आत्मा के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि पंचकोशों—अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोशों से घिरा हुआ यह शरीर ही अयोध्या पुरी है। इसमें निवास करने वाली जीवात्मा राजा दशरथ के समान है।
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पात्रों के आध्यात्मिक प्रतीक
उन्होंने रामकथा के प्रमुख पात्रों के आध्यात्मिक प्रतीकों को समझाया:
- कौशल्या: निवृत्ति का प्रतीक, जिनसे ज्ञान रूपी राम का प्राकट्य हुआ।
- कैकेयी: प्रवृत्ति का प्रतीक, जिनसे वैराग्य रूपी भरत का जन्म हुआ।
- सुमित्रा: भक्ति का प्रतीक, जिनसे विवेक रूपी लक्ष्मण और विचार शक्ति रूपी शत्रुघ्न का प्राकट्य हुआ।
शंकराचार्य ने आगे बताया कि विश्वामित्र के यज्ञ में विघ्न डालने वाले राक्षस वास्तव में मनुष्य के भीतर मौजूद काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर जैसे विकारों के प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि साधना की रक्षा के लिए केवल भावना ही नहीं, बल्कि ज्ञान और विवेक भी अत्यंत आवश्यक हैं।
अहंकार और ममकार का बंधन
जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि दशरथ का राम को अपना पुत्र मानकर मोह में पड़ना, जीव के ‘मैं’ और ‘मेरा’ भाव का प्रतीक है।
उन्होंने समझाया कि अहंकार कहता है—‘मैं’, जबकि ममकार कहता है—‘मेरा’। यही दो भाव मनुष्य को संसार के बंधनों में मजबूती से बांधते हैं।
इस कथा में गुरु वशिष्ठ ज्ञान के प्रतीक हैं, जो जीवात्मा को इस मोह और बंधन से बाहर निकालने का मार्ग दिखाते हैं। रामकथा का वास्तविक संदेश अपने भीतर ज्ञान रूपी राम, विवेक रूपी लक्ष्मण, वैराग्य रूपी भरत और विचार शक्ति रूपी शत्रुघ्न को जागृत करना है।
आज मनाया जाएगा वर्धन्ती दिवस
पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानन्द सरस्वती महाराज का वर्धन्ती दिवस आज सिरोही के नंदगांव केसुआ के श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ में भव्य रूप से मनाया जाएगा।
इस आयोजन में कई संत-महात्मा, श्रद्धालु और सनातन धर्मावलंबी भाग लेंगे। यह अवसर केवल एक जन्मदिवस समारोह नहीं, बल्कि तप, त्याग, ज्ञान, गुरु-भक्ति और लोकसेवा से निर्मित एक महान साधक की प्रेरणादायी जीवनयात्रा को नमन करने का अवसर है।
महोत्सव में ऋषिचैतन्यजी महाराज, चेतननाथजी महाराज सहित बड़ी संख्या में गोभक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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