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नीलू की कलम से: मीरा इतनी सस्ती नहीं, ना ही ऐसी साधना आसान।
लोग हमसे भी अपने विचार रखने को कह रहे हैं। उन्हें अपेक्षा है कि मैं 'आधुनिक मीरा' शीर्षक से बहुत बड़ा लेख लिखूंगी। 'अहो'...
नीलू की कलम से: चदरिया ऊनी रे ऊनी...
चादर ओढ़े हुए स्त्री-पुरुष वैसे भी आकर्षक लगते हैं फिर बल्डी और पट्टूडे़ के तो कहने ही क्या। बल्डी में रंग और पैटर्न सी...
नीलू की कलम से: धन ए माता राबड़ी
राबड़ी सर्वथा त्रिदोष रहित है क्योंकि वात का शमन बाजरी करती है, पित का शमन छाछ और कफ का शमन सांभरिया लूण। राबड़ी नितांत...
मिथिलेश के मन से: यह तुम्हीं हो? कहीं धोखा तो नहीं खा रहे हम?
आंखें देख नहीं पा रहीं, आवाज़ देने पर भी दिमाग का क्रोनोमीटर उसे बता नहीं पा रहा कि यह मिथिलेश है जिसके साथ उसने दर्जनों...
नीलू की कलम से: पट्टे की पूछ
सच पूछिए तो ये पट्टे वाले प्राणी कुत्ते जैसे लगते भी नहीं। कुत्तों की अपनी एक बिरादरी है पूरी ठसकदार और खानदानी। ठसक देख...
मिथिलेश के मन से: जन्मदिन के बहाने से
मैंने वादा किया था, मैं लिखूंगा। लगातार लिखूंगा। लिखना बचाता है, इसलिए। संजीदगी से लिखा क्या? वह कौन सा लिखा- पढ़ा है मे...
मिथिलेश के मन से: रंग बचाने का जुनून!
यह कवि है रवींद्र भारती। बहुत दूर रहते हुए भी जो हमारे बेहद करीब होने की प्रतीति दिलाता है- किसी खेत, किसी खलिहान, किसी...
नीलू की कलम से: अपनी रेल
रेल नाम जब भी आपके जेहन में आता है तो एक दनदनाती, खड़खड़ाती और पवन वेग से उड़ती मशीन जेहन में आती है पर कोटा जोधपुर (रेल...
मिथिलेश के मन से: कचौड़ी गली सून कइलs बलमू - पांचवीं किश्त
शेड्स बहुरंगी हैं, लिहाजा विषयांतर भी संभव है क्योंकि कंठ स्वरों में फूटे किस्से एक दिन में खतम नहीं होते। यह वह इतिहास...
मिथिलेश के मन से: कचौड़ी गली सून कइलs बलमू -चौथी किश्त
पहले पटना सिर्फ पटना हुआ करता था और मुद्दतों सिर्फ पटना ही रहा। दानापुर,फुलवारी, मनेर, सिटी, कुम्हरार, फतुहा, बिहटा, कुल...
मिथिलेश के मन से: कचौड़ी गली सून कइलs बलमू - तीसरी किश्त
उस बुलडोजर की अपनी कोई आवाज़ नहीं होती। कोई भोंपू, कोई मुनादी, कोई डुगडुगी पार्टी नहीं हुआ करती है उसके साथ। तो.. ऐसा ही...
नीलू की कलम से: मुकातो
मारवाड़ी बोलना गलत है तो घर,परिवार और समाज बोलता क्यों है? हिंदी बोलना ही अच्छा है तो किसीने अब तक सिखाई क्यों नहीं? पर...
नीलू की कलम से: पैड की पीड़ा
वह परेशानी जिससे बड़ी उम्र की कामकाजी महिलाएं तक डील नहीं कर पातीं,ये मासूम बच्चियां सयानेपन से छिपा ले जाती हैं। पर ये...