नीलू की कलम से: जाओ ठाकुर! भूल जायेंगे..
राजपूत की रेखाएं बड़े रूखेपन से खींची गई है। उसके एक हाथ में तलवार तो दूजे हाथ में कस्सी-कुल्हाड़ी रही। युद्धकाल में तलव...
पेशे से शिक्षिका! राजस्थान विश्वविद्यालय में रिसर्च कर रही हैं और लिखती हैं जन की बात मन की भाषा में। फेसबुक पर बौद्धिक चेतना के शिखर वाले वर्ग में नीलू खूब पढ़ी जाती हैं। जड़ों से जुड़े विषयों पर मौलिक लेखन जो सीधा पाठक का जुड़ाव कराता है। नीलू अपने लेखन में शब्दों से तस्वीर उकेरती हैं, जो पढ़ने वालों की आंखों के रास्ते मन में उतर जाती है।
राजपूत की रेखाएं बड़े रूखेपन से खींची गई है। उसके एक हाथ में तलवार तो दूजे हाथ में कस्सी-कुल्हाड़ी रही। युद्धकाल में तलव...
एक जमाना था जब इन पर तेजा, चिरजां और फागण बजते थे। हिंदी गीत-संगीत नहींवत् बजता है इनपर, कह लीजिए अघोषित बहिष्कार। लेकिन...
लोकेंद्र सिंह जी अकसर गोठ में आते थे इसलिए उन्हें ज्यादा देखने-सुनने का मौका ही न मिल पाता क्योंकि अधिकांश राजपूत घरों...
गांवों के टाबरों के और खासकर पहले के टाबरों के संग्रह में रेडिमेड खिलौने बहुत सीमित होते। अपने खिलौने हम स्वयं तैयार करत...
एक और चीज जिसमें हमने फूल को जिंदा रखा वह है-'फूल्या'। वही फूल्या जो ज्वार और मक्की को तिड़काकर बनाए जाते हैं। वही फूल्...
ठाकर साब आपको याद है? काळे-धोळे मिंयों ने माड्याणी (जबरदस्ती) लड़ाई मांड ली। आपकी कालवी घोड़ी (काला तगरा) जिसके बिना आप...
इस लंबी अवधि ने जानियों (बारातियों) की स्मृति में विभ्रम उत्पन्न किया,जनेती गांव का नाम भूल गए। 'टोल्डो-टोल्डो' करते करत...
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से जुड़े मामलों पर राजस्थान में प्रसिद्ध लेखक ब्लॉगर नीलू शेखावत की एक टिप्पणी
बात धर्म की हो रही तो शुरुआत धर्म से ही कर लेते हैं। विवाद की जड़ ही धर्म है तो हमने सोचा पहले जान तो लें कि धर्म किसको...
युवा नरेश महाराज अजीत सिंह शेखावत स्वयं स्वाधायशील एवं विद्वान व्यक्तित्व थे। युवा संन्यासी से मिलने को उतावले हो चले।...
हम कहते हैं कुरज हमारी 'धीवड़' है,कुछ दिन ससुराल जाकर लौट आती है। उंगली से नख न्यारे हो तो कुरजां हमसे न्यारी हो। कुरज ह...
आखिर छोटे बेटों ने बड़े भाईसाब को मैसेज भेजा। भाईसाब माटसाब थे। मारवाड़ी उनको 'जमती' नहीं थी और हिंदी उनसे 'समती' नहीं थ...
माज़ी का दर्द और इश्क़ के अफ़साने शायर की कलम ,उसके गज़ल कहने के अन्दाज़ को बिल्कुल अलग, उम्दा और खास बना देते है। यह शे...
नीलू शेखावत की एक रचना: दूर से चमकते चांद की उपमा कवि कुलगुरु से होती हुई अन्यान्य सौन्दर्य बिंबों में होती रही प्रति...
पहियों पर इश्क़ ▪️ आसान नहीं पहियों पर ज़िंदगी, पाना पेचकस थामे हाथ, और ग्रीस से सनी हथेलियों की, मिटने लगती हैं सारी रे...