शख्सियत

वेदांता डीमर्जर: 2 शेयरों में लोअर सर्किट, 2 में उछाल

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 15 जून 2026, 12:00 दोपहर
डीमर्जर के बाद लिस्ट हुई 4 कंपनियों में से एल्युमिनियम और ऑयल एंड गैस में लोअर सर्किट लगा, जबकि आयरन एंड स्टील में शानदार तेजी आई।

मुंबई | अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप के डीमर्जर के बाद बनी चार नई कंपनियों के शेयर आज शेयर बाजार में लिस्ट हो गए। लिस्टिंग के दिन निवेशकों को मिला-जुला अनुभव मिला, जहां कुछ शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, वहीं कुछ ने शानदार तेजी दिखाई।

यह डीमर्जर भारत के धातु और खनन क्षेत्र में एक बड़ी कॉर्पोरेट पुनर्गठन प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य विभिन्न व्यवसायों को अलग-अलग पहचान देना है ताकि उनका सही मूल्यांकन हो सके।

किन शेयरों में लगा लोअर सर्किट?

लिस्टिंग के कुछ ही देर बाद दो कंपनियों के शेयरों में लोअर सर्किट लग गया। वेदांता एल्युमिनियम मेटल का शेयर सबसे अधिक कीमत 522 रुपये पर लिस्ट हुआ था।

हालांकि, सुबह 10:10 बजे तक यह बीएसई पर 5 फीसदी के लोअर सर्किट के साथ 500.65 रुपये पर आ गया।

इसी तरह, वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड का शेयर एनएसई पर 38 रुपये पर लिस्ट हुआ, लेकिन जल्द ही इसमें भी 5 फीसदी का लोअर सर्किट लग गया और यह 36.10 रुपये पर आ गया।

आयरन एंड स्टील में दिखी शानदार तेजी

दूसरी ओर, वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड के शेयर ने निवेशकों को खुश कर दिया। यह शेयर 20 रुपये पर लिस्ट हुआ और शुरुआती कारोबार में ही 5.30 फीसदी बढ़कर 21.06 रुपये पर पहुंच गया।

वेदांता पावर लिमिटेड के शेयर में भी तेजी देखने को मिली। यह 41.8 रुपये पर लिस्ट हुआ और लगभग 2.37 फीसदी की बढ़त के साथ 42.79 रुपये पर कारोबार करता दिखा।

निवेशकों के लिए क्या हैं नियम?

फिलहाल इन चारों कंपनियों के शेयरों को 'ट्रेड-टू-ट्रेड' (T2T) सेगमेंट में रखा गया है। इसका मतलब है कि शुरुआती 10 दिनों तक इन शेयरों की फिजिकल डिलीवरी अनिवार्य होगी।

इस नियम के कारण, निवेशक इन शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे। यह कदम आमतौर पर शुरुआती दिनों में शेयरों में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए उठाया जाता है।

डीमर्जर की रिकॉर्ड डेट 1 मई थी, और निवेशकों को वेदांता लिमिटेड के हर 1 शेयर के बदले प्रत्येक नई कंपनी का 1 शेयर मिला है।

इस पुनर्गठन से अब एल्युमिनियम, पावर, ऑयल एंड गैस, और आयरन एंड स्टील जैसे व्यवसायों का मूल्यांकन स्वतंत्र रूप से किया जा सकेगा, जिससे निवेशकों को हर सेक्टर में निवेश के बेहतर अवसर मिलेंगे।

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