सद्य सूंटा तुकबंदी????
नीलू की कविता: सद्य सूंटा तुकबंदी
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आंधी चाली तो बा चाली
कोई मेह बरस तो बो बरसे
धूल टिकोळ्यां चढगी
कोई लुळ लुळ रूंख जमीं परस
कड़ड़ कड़ड़ करड़ाव बिजळी
घड़ड़ घड़ड़ बादळ गरजे
झड़ड़ झड़ड़ झड़ लागी जोरां
जीव जिवारी न तरस
भड़़ड़ भड़ड़ कर भिड़ी किवांड़्यां
दड़ड़ दड़ड़ नाळा डाके
सड़ड़ सड़ड़ सूंटा क सागे
झूंपा छान उड़्या फर्र स
अड़ड़ अड़ड़ माची बांठां म
खड़ड खड़ड ठूंठा बाजे
तड़ड़ तड़ड़ लागी ओळां की
मोर्या कुरळाव डर स