राजस्थान

ट्रोमा सेंटर पर बवाल: श्रीडूंगरगढ़ में बवाल: MLA बोले- तब मर गए थे क्या?

बलजीत सिंह शेखावत · 16 जून 2026, 09:38 सुबह
श्रीडूंगरगढ़ में जनसुनवाई के दौरान ट्रोमा सेंटर की मांग पर भाजपा विधायक और RLP नेता में तीखी बहस हो गई।

श्रीडूंगरगढ़ | राजस्थान के बीकानेर स्थित श्रीडूंगरगढ़ में एक जनसुनवाई के दौरान माहौल गरमा गया। कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा की मौजूदगी में भाजपा विधायक ताराचंद सारस्वत और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नेता विवेक माचरा के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद का केंद्र बिंदु इलाके में प्रस्तावित ट्रोमा सेंटर के निर्माण में हो रही देरी थी।

जनसुनवाई में क्यों हुआ हंगामा?

मामला तब शुरू हुआ जब RLP नेता विवेक माचरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा किए गए ट्रोमा सेंटर के वादे को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि वादा पूरा न होने के कारण हाल ही में 6 लोगों की जान चली गई।

इस पर भाजपा विधायक ताराचंद सारस्वत भड़क गए। उन्होंने कहा कि आश्वासन जुलाई 2025 तक का था, तो ढाई साल कैसे हो गए? जब एक किसान ने कहा कि एक साल तो बीत चुका है, तो विधायक ने आपा खो दिया।

उन्होंने एक बेहद असंवेदनशील टिप्पणी करते हुए कहा:

तीन साल तक डुबोए रखा था, तब मर गए थे क्या?

इस बयान के बाद विवेक माचरा और उनके समर्थक भड़क गए और विरोध तेज हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और माचरा को पीछे हटाना पड़ा।

मंत्री ने दिया आश्वासन

हंगामे के बीच कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा ने मोर्चा संभाला। उन्होंने विवेक माचरा को वापस बातचीत के लिए बुलाया और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।

मंत्री गोदारा ने कहा कि श्रीडूंगरगढ़ में हुआ हादसा दुखद है और सरकार ट्रोमा सेंटर के लिए पूरी तरह प्रयासरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि न केवल श्रीडूंगरगढ़, बल्कि लूणकरनसर जैसे अन्य क्षेत्रों में भी इस पर काम चल रहा है और इसे जल्द शुरू किया जाएगा।

मंत्रियों के विवादित बयानों का सिलसिला

यह घटना राजस्थान में भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए विवादित बयानों की श्रृंखला में एक और कड़ी है। इससे पहले 11 जून को स्वास्थ्य मंत्री ने भी एक असंवेदनशील बयान दिया था।

पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले पर उन्होंने डॉक्टरों का बचाव करते हुए कहा था, "वे पैदल आई थीं या नाचते हुए आई थीं?"

इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मंत्री के इस्तीफे की मांग की, जबकि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे मातृत्व का अपमान बताया।

इन घटनाओं ने राज्य सरकार की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनसुनवाई जैसे मंचों पर जनप्रतिनिधियों से संयम और संवेदनशीलता की उम्मीद की जाती है, लेकिन ऐसे बयान जनता के गुस्से को और भड़का रहे हैं।

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