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खेल

सिरोही अस्पताल: बदहाली का खेल: सिरोही जिला अस्पताल में बदहाली का खेल: सांसद और अधिकारी भी दंग, सफाई ठेकेदार का भुगतान रोकने के निर्देश

गणपत सिंह मांडोली

सिरोही जिला अस्पताल में सांसद और अधिकारियों के दौरे में कई कमियां उजागर हुईं। गंदगी, स्ट्रेचर की कमी और अव्यवस्थाएं देखकर सभी दंग रह गए, जिसके बाद सफाई ठेकेदार का भुगतान रोकने के निर्देश दिए गए।

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HIGHLIGHTS

  • सांसद और अधिकारियों ने सिरोही जिला अस्पताल का दौरा किया। अस्पताल में गंदगी, टूटे शौचालय और बायोवेस्ट की भरमार मिली। मरीजों के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की कमी साफ दिखी। पीएमओ कमियां छिपाने की कोशिश करते नजर आए। सफाई ठेकेदार का भुगतान रोकने और दो दिन में व्यवस्था सुधारने के निर्देश।
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MP Lumbaram Choudhary in Sirohi Hospital

सिरोही. थिंक 360 द्वारा एक दिन पहले प्रमुखता से उठाए गए मामले के बाद, सिरोही के राजकीय मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध जिला अस्पताल की बदहाली और अव्यवस्थाओं की जांच के लिए प्रशासन हरकत में आया। मंगलवार को सांसद लुम्बाराम चौधरी ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अस्पताल का दौरा किया, जहां उन्हें एक-दो नहीं बल्कि कई गंभीर कमियां नजर आईं। अस्पताल की स्थिति इतनी दयनीय थी कि अधिकारियों को भी अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ।

बदहाली का खेल: हर कदम पर अव्यवस्था

अस्पताल परिसर में कदम रखते ही गंदगी और बदबू का सामना करना पड़ा। सफाई के माकूल प्रबंध नदारद थे और अधिकतर शौचालय गंदगी से भरे हुए थे, जहां खड़े रहना भी दूभर था। वार्डों के बाहर बॉयोवेस्ट, कचरा और असहनीय बदबू ने हालात को और भी खराब कर दिया था। सांसद और प्रशासनिक अधिकारी इन कमियों को देखकर दंग रह गए।

मरीजों को लाने-ले जाने के लिए आवश्यक स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की सुविधा आज भी उपलब्ध नहीं थी। अधिकारियों के सामने ही परिजन मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाते दिखे, जिससे अस्पताल प्रशासन की लापरवाही साफ जाहिर हुई। इस मामले में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. वीरेंद्र महात्मा खुद बगलें झांकते नजर आए। अधिकारियों ने जब स्ट्रेचर और कार्मिकों की संख्या पूछी, तो कोई भी जानकारी देने को तैयार नहीं हुआ। बार-बार कहने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने न तो स्ट्रेचर और व्हीलचेयर दिखाए और न ही उन्हें ढोने के लिए कार्यरत कार्मिकों को प्रस्तुत किया। इस दौरे में अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेश गोयल और जिला परिषद सीईओ प्रकाशचंद्र अग्रवाल भी मौजूद रहे।

शौचालयों की बदतर स्थिति

सांसद ने वार्डों में शौचालयों का जायजा लिया। ये वे वार्ड थे जहां ऑपरेशन के बाद मरीजों को भर्ती किया जाता है, लेकिन गंदगी के कारण शौचालयों का उपयोग करना तो दूर, उनके पास खड़े रहना भी मुश्किल था। सांसद ने एडीएम और सीईओ को पास बुलाकर इन हालात को दिखाया। अधिकारी इसे देखकर स्तब्ध रह गए कि जिला अस्पताल की इतनी बुरी स्थिति कैसे हो सकती है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर

एडीएम राजेश गोयल ने पीएमओ कक्ष में सांसद की मौजूदगी में जानकारी ली। अस्पताल की स्थितियों को देखकर वे काफी बिगड़े और दो टूक शब्दों में कहा कि "इससे बढ़िया व्यवस्था तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर होती है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अन्य अस्पताल भी देखे हैं, लेकिन यहां के हालात बेहद बदतर नजर आते हैं।

कमियां छिपाने का प्रयास

इतनी बदतर हालत के बावजूद प्रमुख चिकित्सा अधिकारी अस्पताल की कमियों को छिपाने का प्रयास करते दिखे। वे सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने ही नर्सिंग अधीक्षक को कहते दिखे कि "ये आज आए और इनको यह सब गंदगी व कमियां दिख गई, हमें क्यों नहीं दिखा।" यह दर्शाता है कि अस्पताल प्रशासन अपनी कमियों को स्वीकार करने के बजाय उन्हें छिपाने की कोशिश कर रहा था। मरीजों को लाने-ले जाने के लिए स्ट्रेचर, व्हील चेयर की सुविधा आज भी नहीं दिखी। यहां तक कि अधिकारियों के सामने ही परिजन स्ट्रेचर लेकर मरीज को ले जाते दिखे। 

सफाई ठेकेदार पर कार्रवाई

सांसद ने इस संबंध में पीएमओ को तत्काल निर्देशित किया। उन्होंने सफाई ठेकेदार का भुगतान रोकने के निर्देश दिए और पीएमओ से कहा कि दो दिन में सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जानी चाहिए। उन्होंने सफाई ठेकेदार से यह सारी व्यवस्था करवाने को कहा और सफाई संबंधी रजिस्टर भी अपने कब्जे में लिया। एडीएम ने भी सफाई के माकूल प्रबंध करने को लेकर सख्त निर्देश दिए। यह उम्मीद की जा रही है कि इन निर्देशों के बाद जिला अस्पताल की स्थिति में सुधार आएगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

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