राजस्थान

किसानों के पैसे, VVIP मौज: किसानों के 5 करोड़ से VVIP मौज, शराब-पार्टी, 1.25 लाख के रिटर्न गिफ्ट भी दिए

बलजीत सिंह शेखावत · 28 मई 2026, 07:22 शाम
नहर मरम्मत के बजट से VVIP मेहमानों की 5 सितारा होटलों में आवभगत, 1.25 लाख के रिटर्न गिफ्ट भी दिए।

बीकानेर/जैसलमेर | राजस्थान में सरकारी फिजूलखर्ची का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। यहां इंदिरा गांधी नहर परियोजना विभाग ने नहरों की मरम्मत के लिए आए बजट में से 5 करोड़ 9 लाख रुपए VVIP मेहमानों की आवभगत में उड़ा दिए।

VVIP आवभगत में उड़ाए किसानों के 5 करोड़

यह कहानी है सरकारी धन की खुली लूट की, जहां स्वागत के लिए 11 हजार की मालाएं खरीदी गईं, चाय-बिस्किट की एक प्लेट पर 2500 रुपए खर्च हुए, और डिनर की एक थाली 21 हजार रुपए की थी।

यह सब उस पैसे से किया गया जो नहरों की मरम्मत के लिए था, ताकि किसानों के खेतों तक पानी पहुंच सके। लेकिन अधिकारियों ने इस पैसे को मेहमानों की शराब-पार्टी और 5 सितारा होटलों की बुकिंग पर खर्च कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, रावी-व्यास जल न्यायाधिकरण (RBWT) का 59 सदस्यों का एक दल 5 मार्च से 8 मार्च तक राजस्थान के चार दिवसीय दौरे पर आया था।

इस दल का उद्देश्य किसानों से बातचीत करना और यह जांचना था कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना में समझौते के तहत रावी-व्यास नदी से पूरा पानी मिल रहा है या नहीं।

इन सदस्यों को 'स्टेट गेस्ट' का दर्जा प्राप्त था, जिन्हें नियमानुसार सरकारी गेस्ट हाउस या सर्किट हाउस में ठहराया जा सकता था, जहां किराया मात्र 500 से 1500 रुपए होता है।

लेकिन विभाग ने VVIP प्रोटोकॉल की आड़ में बीकानेर और जैसलमेर के सबसे महंगे 5 सितारा होटलों को चुना, जहां एक कमरे का किराया 59 हजार रुपए तक था।

स्वागत में ही फूंक दिए लाखों

मेहमानों के स्वागत में कोई कमी नहीं रखी गई। बीकानेर पहुंचते ही 11 हजार रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से माला और बुके पर खर्च किया गया।

यह स्वागत दो बार हुआ, एक बार बीकानेर में और दूसरी बार जैसलमेर में। दोनों जगहों पर स्वागत के नाम पर ही 24 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए गए।

बीकानेर में शाही खर्च: बिल देखकर चौंक जाएंगे

दौरे की शुरुआत बीकानेर से हुई और यहीं से फिजूलखर्ची का खेल शुरू हो गया। मेहमानों की संख्या सिर्फ 59 थी, लेकिन खर्च के बिलों में यह संख्या सैकड़ों में दिखाई गई।

59 मेहमान, 80 कमरे बुक

आधिकारिक तौर पर मेहमानों की संख्या 59 बताई गई, लेकिन बीकानेर के एक पांच सितारा होटल में 80 कमरे बुक किए गए।

इन कमरों की बुकिंग पर 5 लाख 20 हजार रुपए का बिल बनाया गया। सवाल यह है कि जब मेहमान 59 थे तो 80 कमरे किसके लिए बुक हुए?

इसके अलावा, मेहमानों को ठहराने के लिए नरेंद्र भवन, चंद्र भवन, बसंत विहार और सागर निवास जैसे महंगे होटलों को भी चुना गया।

चाय-नाश्ते पर अंधाधुंध खर्च

खर्च के दस्तावेजों में सबसे बड़ी धांधली चाय-नाश्ते के बिलों में नजर आती है। छतरगढ़ में RD 507 पर 600 लोगों के लिए चाय और स्नैक्स की व्यवस्था दिखाई गई।

यहां प्रति व्यक्ति 2500 रुपए की दर से बिल बनाया गया, जो कुल 15 लाख रुपए होता है। यह हैरान करने वाला है क्योंकि मेहमानों की कुल संख्या 59 थी।

कई होटल रूम बुकिंग के साथ कॉम्प्लिमेंट्री ब्रेकफास्ट देते हैं, लेकिन विभाग ने 6 मार्च की सुबह 83 लोगों के लिए अलग से ब्रेकफास्ट का आयोजन किया, जिसमें प्रति व्यक्ति 3000 रुपए खर्च हुए। इसका बिल 2 लाख 49 हजार रुपए बना।

हजारों की लंच-डिनर प्लेट

मेहमानों के खाने पर भी बेतहाशा खर्च किया गया। एक जगह 350 लोगों के लिए लंच की व्यवस्था की गई, जिसमें प्रति प्लेट 8 हजार रुपए का खर्च आया। इसका कुल बिल 28 लाख रुपए बना।

इसी तरह, 300 लोगों के लिए डिनर का आयोजन किया गया, जहां प्लेट की दर 8 हजार रुपए थी। इस पर 24 लाख रुपए खर्च हुए।

56 हजार का एक कमरा

विभाग ने मेहमाननवाजी में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। 5 मार्च को एक पांच सितारा होटल में 3 मेहमानों के लिए हेरिटेज कमरे बुक किए गए, जिनमें से प्रत्येक का किराया 56,640 रुपए था।

इन तीन कमरों पर ही 1 लाख 69 हजार 920 रुपए खर्च कर दिए गए। एक अन्य होटल में 3 मेहमानों के लिए इंडियन सुइट बुक किए गए, जिनका किराया 44,840 रुपए प्रति कमरा दिखाया गया, जबकि होटल की वेबसाइट पर इनका किराया 26 हजार रुपए था।

जैसलमेर में भी नहीं रुकी फिजूलखर्ची

बीकानेर के बाद जब दल जैसलमेर पहुंचा, तो वहां भी खर्च का मीटर रुकने का नाम नहीं ले रहा था। यहां भी स्वागत से लेकर डिनर तक लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए गए।

दोबारा स्वागत, दोबारा लाखों का खर्च

जैसलमेर पहुंचने पर 120 मेहमानों के स्वागत की व्यवस्था की गई। यहां भी प्रति व्यक्ति 11 हजार रुपए की दर से माला और बुके पर खर्च किया गया, जिसका कुल बिल 13.2 लाख रुपए बना।

5 सितारा होटलों में सुइट्स की बुकिंग

जैसलमेर के एक पांच सितारा होटल में 27 ‘A’ कैटेगरी के सुइट रूम बुक किए गए, जिनका किराया 35,400 रुपए प्रति कमरा था। इस पर 9 लाख 55 हजार रुपए खर्च हुए।

इसके अलावा, ‘B’ कैटेगरी के 66 डीलक्स रूम भी बुक किए गए, जिनका किराया 21,240 रुपए प्रति कमरा था। इस पर 14 लाख रुपए से ज्यादा का बिल बना।

एक अन्य होटल में 112 मेहमानों के लिए कमरे बुक किए गए, जहां प्रति कमरा 18,880 रुपए का भुगतान किया गया। इसका कुल बिल 21.14 लाख रुपए था।

रेगिस्तान में 21 हजार की डिनर प्लेट

जैसलमेर के सम के धोरों में मेहमानों के लिए डिनर और घूमने की खास व्यवस्था की गई। यहां 150 मेहमानों के लिए प्रति व्यक्ति 21,240 रुपए खर्च किए गए।

इस शाही डिनर का कुल बिल 31.86 लाख रुपए आया। यह डिनर की सबसे महंगी प्लेटों में से एक थी।

इसके अलावा, होटल मैरिएट में 150 मेहमानों के लिए 8,260 रुपए प्रति प्लेट के हिसाब से डिनर रखा गया, जिस पर 12.39 लाख रुपए खर्च हुए।

सबसे बड़ा घोटाला: 1.32 करोड़ के रिटर्न गिफ्ट

इस पूरे दौरे में खर्च का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा रिटर्न गिफ्ट का है। दौरे से लौटने पर टीम के सदस्यों और अन्य मेहमानों को स्मृति चिन्ह दिए गए।

हर मेहमान को 1.25 लाख का तोहफा

कुल 105 मेहमानों को ये गिफ्ट दिए गए और प्रत्येक गिफ्ट की कीमत 1.25 लाख रुपए बताई गई है। इस पर कुल 1 करोड़ 32 लाख रुपए खर्च किए गए।

यह राशि कुल खर्च का लगभग 25% है। यह सवाल उठता है कि ऐसा कौन सा स्मृति चिन्ह था जिसकी कीमत सवा लाख रुपए थी।

कहां से आया ये पैसा? नहर मरम्मत का बजट किया डायवर्ट

सबसे गंभीर बात यह है कि यह सारा पैसा उस बजट से खर्च किया गया जो किसानों के लिए था। अधिकारियों ने नहरों की मरम्मत के लिए आवंटित बजट को मेहमानवाजी के लिए डायवर्ट कर दिया।

मुख्य अभियंता विवेक गोयल ने इंदिरा गांधी नहर मंडल सचिव को लिखे पत्र में कहा कि नहरों में प्रस्तावित कार्यों की धीमी प्रगति के कारण इस मद में प्राप्त 34 करोड़ की बजट राशि का पूरा उपयोग संभव नहीं है। इसलिए इस बजट में से 509.79 लाख का पुनर्विनियोजन करवाया जाए।

यह पत्र इस बात का सीधा सबूत है कि अधिकारियों ने जानबूझकर नहर मरम्मत के काम को धीमा किया ताकि बजट को दूसरे कामों में खर्च किया जा सके।

आंकड़ों का मायाजाल: मेहमान 59, बिल 600 लोगों का

इस पूरे खर्च में एक पैटर्न साफ नजर आता है - मेहमानों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना। मेहमान सिर्फ 59 थे, लेकिन बिलों में यह संख्या 101, 120, 150, 300, 350 और यहां तक कि 600 तक दिखाई गई।

पहचान पत्र बनाने के नाम पर भी धांधली की गई। 350 लोगों के लिए आई-कार्ड बनाए गए और प्रति कार्ड 1 हजार रुपए का बिल लगाया गया, जिस पर 3.5 लाख रुपए खर्च हुए।

जांच की मांग

यह पूरा मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण है। जिस विभाग पर किसानों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी है, वही उनके हक के पैसे को VVIP मेहमानों पर लुटा रहा है।

इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।

निष्कर्ष: किसानों के जख्मों पर नमक

एक तरफ राजस्थान के किसान पानी की कमी से जूझ रहे हैं, उनकी फसलें सूख रही हैं, और दूसरी तरफ उनके लिए बनी नहरों की मरम्मत का पैसा अधिकारियों की मेहमानवाजी पर खर्च हो रहा है। यह न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि किसानों के साथ एक क्रूर मजाक भी है। 5 करोड़ रुपए से कई किलोमीटर लंबी नहर की मरम्मत हो सकती थी, जिससे हजारों किसानों को फायदा होता।

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