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खेल

रामलीला में अवैध लॉटरी: माउंट आबू में रामलीला की आड़ में अवैध लॉटरी का खेल, प्रशासन खामोश!

गणपत सिंह मांडोली

माउंट आबू (Mount Abu) में रामलीला (Ramleela) की आड़ में अवैध लॉटरी (illegal lottery) जारी है। प्रशासन (administration) खामोश।

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HIGHLIGHTS

  • माउंट आबू में रामलीला के नाम पर अवैध लॉटरी का खेल। लॉटरी एक्ट 1998 की धारा 2B का सीधा उल्लंघन। प्रशासन और पुलिस रसूखदारों के दबाव में खामोश। अन्य शहरों में ऐसी गतिविधियों पर हुई थी सख्त कार्रवाई।
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Lottery Ticket for Aburoad Ramleela

माउंट आबू. माउंट आबू (Mount Abu) में रामलीला (Ramleela) की आड़ में अवैध लॉटरी (illegal lottery) जारी है। प्रशासन (administration) खामोश। माउंट आबू के शांत और धार्मिक वातावरण में इन दिनों एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रामलीला जैसे पवित्र आयोजन की आड़ में अवैध लॉटरी का खेल खुलेआम चल रहा है। यह स्थिति शहर में कानून व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक रामलीला मंचन के दौरान, आयोजकों द्वारा इनामी कूपन बेचे जा रहे हैं। इन कूपनों के माध्यम से मोटरसाइकिल, फ्रिज जैसे आकर्षक सामानों का लालच देकर आम लोगों को फंसाया जा रहा है। यह गतिविधि स्पष्ट रूप से लॉटरी एक्ट 1998 की धारा 2B का उल्लंघन है, जिसके तहत इस तरह के इनामी कूपन निकालना एक सीधा-सीधा अपराध है।

सबसे अधिक चिंताजनक पहलू यह है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस अवैध गतिविधि पर आंखें मूंद रखी हैं। रामलीला मंचन स्थल पर खुलेआम टेबल लगाकर कूपन बेचे जा रहे हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रशासन ने जानबूझकर खामोशी की चादर ओढ़ ली है और आयोजकों को खुली छूट दे दी गई है।

aburoad ramleela lottery

यह स्थिति और भी गंभीर इसलिए हो जाती है, क्योंकि राज्य के अन्य हिस्सों में ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की गई है। गौरतलब है कि मंडार, नागौर और जालौर जैसे शहरों में इसी तरह के अवैध लॉटरी आयोजनों पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आयोजकों को गिरफ्तार किया था। लेकिन माउंट आबू में रसूखदारों के कथित दबाव के चलते पुलिस और प्रशासन दोनों ही निष्क्रिय बने हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार, आयोजन समिति के कई पदाधिकारी विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं। इसी राजनीतिक संरक्षण और दबाव के कारण प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। यह स्थिति कानून के शासन और न्याय के सिद्धांतों पर प्रश्नचिह्न लगाती है। सवाल यह है कि क्या कानून केवल आमजन के लिए है और रसूखदारों पर यह लागू नहीं होता? क्या राजनीतिक प्रभाव के कारण अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा? इस मामले में उच्च अधिकारियों को तत्काल संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि कानून का राज स्थापित हो सके।

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