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सांसद लुंबाराम ने उठाया सौर ऊर्जा मुद्दा: जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी ने संसद में उठाई सोलर और बैटरी स्टोरेज की मांग, किसानों की आय पर दिया जोर

ललित पथमेड़ा

जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी ने संसद में सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज की वर्तमान स्थिति पर सवाल पूछे। सरकार ने जवाब में पीएम सूर्य घर और कुसुम योजना की सफलताओं के साथ भविष्य के रोडमैप की जानकारी दी।

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HIGHLIGHTS

  • सांसद लुंबाराम चौधरी ने संसद में सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।देश में 41 गीगावाट-आवर (GWh) ऊर्जा स्टोरेज की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है।सरकार ने स्टोरेज परियोजनाओं के लिए VGF और PLI जैसी प्रोत्साहन योजनाएं लागू की हैं।पीएम सूर्य घर और पीएम कुसुम योजना से किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
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जालोर-सिरोही | संसद के वर्तमान सत्र में जालोर-सिरोही के सांसद लुंबाराम चौधरी ने क्षेत्र और देश के विकास से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने देश में सौर ऊर्जा के बढ़ते प्रभाव और इसके माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विद्युत मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए छोटे सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने की बात कही।

सांसद ने सरकार से पूछे तीखे और जरूरी सवाल

सांसद लुंबाराम चौधरी ने सदन में शून्यकाल के दौरान राजस्थान सहित पूरे भारत में ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मुख्य रूप से 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम' (BESS) की वर्तमान स्थिति पर सवाल दागा। उनका सवाल था कि राजस्थान जैसे मरुस्थलीय प्रदेश में, जहाँ सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं, वहाँ स्टोरेज तकनीक को लेकर क्या प्रगति हुई है? इसके अलावा, उन्होंने नवीन ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में आए क्रांतिकारी बदलावों और इस क्षेत्र में विदेशी निवेश (Foreign Investment) को आकर्षित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। उनका मानना है कि यदि विदेशी निवेश बढ़ता है, तो तकनीक सस्ती होगी और आम किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ही भविष्य की असली कुंजी है।

सरकार का जवाब: 41 GWh स्टोरेज की है जरूरत

सांसद के सवालों का जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने बताया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर गंभीर है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में वर्तमान में लगभग 41 गीगावाट-आवर (GWh) ऊर्जा स्टोरेज की आवश्यकता है। इस विशाल लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है और कई वित्तीय प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की है। सरकार ने स्पष्ट किया कि स्टोरेज परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं। इससे न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बैटरी की लागत में भी भारी कमी आएगी। यह कदम भारत को वैश्विक सौर ऊर्जा हब बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

किसानों के लिए वरदान बनीं सरकारी योजनाएं

संसद में जानकारी दी गई कि 'पीएम सूर्य घर' और 'पीएम कुसुम' योजना के माध्यम से देश के लाखों किसानों और मध्यम वर्गीय परिवारों को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। बड़े पैमाने पर हो रहे ऊर्जा उत्पादन को संतुलित करने के लिए 'बैटरी स्टोरेज' का विशेष प्रावधान किया जा रहा है ताकि रात के समय भी सौर ऊर्जा का सुचारू उपयोग हो सके। अंत में, सरकार ने बताया कि देश में 'पंप स्टोरेज' (Pumped Storage) परियोजनाओं पर भी युद्ध स्तर पर काम चल रहा है, जो भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी देगा। सांसद लुंबाराम चौधरी की इस सक्रियता और किसानों के प्रति उनकी चिंता की जालोर-सिरोही क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है।

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