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राजस्थान

थाईलैंड जॉब झांसा: झुंझुनूं के दो युवक थाईलैंड में फंसे, मौत के मुंह से लौटे

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राजस्थान (Rajasthan) के झुंझुनूं (Jhunjhunu) जिले के दो युवक अक्षय मीणा (Akshay Meena) और शैलेष मीणा (Shailesh Meena) थाईलैंड (Thailand) में नौकरी के झांसे में फंसकर मौत के मुंह से वापस लौटे हैं। उन्हें साइबर ठगी के चीनी कैंपों में टॉर्चर किया गया।

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HIGHLIGHTS

  • झुंझुनूं के दो युवक थाईलैंड में नौकरी के झांसे में फंसे। म्यांमार सीमा पर साइबर ठगी के चीनी कैंपों में टॉर्चर किया गया। गोलीबारी के बीच जान बचाकर भागे, भारत सरकार ने की मदद। यह घटना विदेश में नौकरी चाहने वाले युवाओं के लिए चेतावनी है।
jhunjhunu youth trapped thailand returned from jaws of death

झुंझुनूं: राजस्थान (Rajasthan) के झुंझुनूं (Jhunjhunu) जिले के दो युवक अक्षय मीणा (Akshay Meena) और शैलेष मीणा (Shailesh Meena) थाईलैंड (Thailand) में नौकरी के झांसे में फंसकर मौत के मुंह से वापस लौटे हैं। उन्हें साइबर ठगी के चीनी कैंपों में टॉर्चर किया गया।

नौकरी का मीठा झांसा

झुंझुनूं के पौंख गांव के अक्षय मीणा और मणकसास गांव के शैलेष मीणा को तीन महीने पहले टेलीग्राम पर डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी का ऑफर मिला था।

उन्हें 80 हजार रुपए महीने वेतन और मुफ्त वीजा-हवाई टिकट का वादा किया गया था।

लिंक पर क्लिक कर जानकारी देने के बाद एजेंटों ने उन्हें अच्छी जिंदगी के सपने दिखाए।

अगस्त महीने में दोनों दिल्ली से बैंकॉक के लिए रवाना हो गए, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

बॉर्डर पर मौत का खेल

बैंकॉक पहुंचते ही एजेंटों ने उन्हें थाईलैंड के दूसरे शहर ले जाने की बात कही।

जंगलों से गुजरते हुए वे थाईलैंड-म्यांमार सीमा पर स्थित केके पार्क पहुंच गए, जहां अवैध साइबर ठगी के कैंप चल रहे थे।

युवकों को जबरन ठगी की ट्रेनिंग दी गई और मना करने पर उन्हें टॉर्चर किया जाने लगा।

उन्हें फर्जी निवेश साइट्स, लॉटरी, ऑनलाइन डेटिंग और क्रिप्टो करेंसी के नाम पर विदेशी लोगों को ठगने के लिए मजबूर किया गया।

चाइनीज कैंपों का आतंक

ये कैंप चीनी कंपनियों द्वारा चलाए जाते हैं, जहां भारत सहित कई देशों के हजारों युवा फंसे हुए हैं।

विरोध करने पर मारपीट, जेल और 4-5 लाख रुपए में दूसरे एजेंटों को बेचने जैसी यातनाएं दी जाती हैं।

अक्षय और शैलेष ने बताया कि काम न करने पर इलेक्ट्रिक शॉक दिए जाते थे और कई दिनों तक भोजन भी नहीं मिलता था।

देश भर से 2000 से अधिक युवा ऐसे भयावह कैंपों में फंसे होने का अनुमान है।

गोलीबारी में बची जान

लगभग 15 दिन पहले कैंप में अचानक गोलीबारी और बमबारी शुरू हो गई, जिससे भगदड़ मच गई।

कुछ युवक सीमा पार कर थाईलैंड पहुंचने में सफल रहे, जबकि कई को स्थानीय माओवादियों ने मार डाला।

अक्षय और शैलेष किसी तरह अपनी जान बचाकर थाईलैंड पहुंचे, जहां से भारत सरकार ने उनकी मदद की।

गृह मंत्रालय ने अब तक 500 से अधिक फंसे हुए भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया है।

घर वापसी और चेतावनी

भारत लौटने के बाद इन दोनों युवकों को जयपुर साइबर सेल को सौंपा गया।

एसपी के आदेश पर एसआई भींवाराम उन्हें जयपुर से गुढ़ागौड़जी थाने ले आए।

मेडिकल जांच और कागजी कार्रवाई के बाद उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया।

यह घटना हर उस युवा के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो बिना सोचे-समझे विदेशी नौकरियों के पीछे भागता है।

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