कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक स्वर्णिम युग की शुरुआत हुई है। शुभेन्दु अधिकारी ने राज्य के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। वे प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने हैं।
शुभेन्दु अधिकारी बने बंगाल के CM: बंगाल में शुभेन्दु राज: PM मोदी ने छुए माखनलाल के पैर
शुभेन्दु अधिकारी ने ली बंगाल के 9वें CM पद की शपथ। पीएम मोदी ने वरिष्ठ नेता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
HIGHLIGHTS
- शुभेन्दु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
- प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर वरिष्ठ नेता माखनलाल सरकार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
- माखनलाल सरकार 1952 के कश्मीर आंदोलन और जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं।
- शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य तरीके से आयोजित हुआ।
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ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य आयोजन
कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस भव्य समारोह में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनने का उत्साह कार्यकर्ताओं के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा था।
शपथ ग्रहण समारोह के शुरू होने से पहले मंच पर एक अत्यंत भावुक दृश्य देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर मौजूद वरिष्ठ भाजपा नेता माखनलाल सरकार के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।
प्रधानमंत्री मोदी का आत्मीय भाव
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प्रधानमंत्री ने न केवल उनके पैर छुए, बल्कि उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया। जैसे ही यह दृश्य बड़ी स्क्रीन पर दिखा, पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और नारों से गूंज उठा।
लोग तुरंत यह जानने के लिए उत्सुक हो गए कि यह वरिष्ठ नेता कौन हैं। माखनलाल सरकार का सम्मान कर पीएम मोदी ने जमीनी कार्यकर्ताओं के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की है।
कौन हैं दिग्गज नेता माखनलाल सरकार?
माखनलाल सरकार उन विरले नेताओं में से हैं जिन्होंने बंगाल में उस समय भाजपा का झंडा उठाया था, जब पार्टी का कोई नामलेवा नहीं था। उनका संघर्ष दशकों पुराना और प्रेरणादायक है।
उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में संगठन को खड़ा करने का काम किया। जब बंगाल में भाजपा का कोई जनाधार नहीं था, तब माखनलाल जी ने गांव-गांव जाकर विचारधारा का प्रचार किया।
जनसंघ के दौर से जुड़े हैं तार
आपको बता दें कि माखनलाल सरकार का राजनीतिक सफर जनसंघ के समय से शुरू हुआ था। वे 1952 में कश्मीर आंदोलन का हिस्सा रहे थे, जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्याग्रह किया था।
1952 में जब जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में तिरंगा फहराने की कोशिश की थी, तब माखनलाल जी उनके साथ मजबूती से खड़े थे। वे उस ऐतिहासिक आंदोलन के सिपाही रहे हैं।
कश्मीर आंदोलन के साक्षी
कश्मीर की अखंडता के लिए किए गए उस संघर्ष ने उनके भीतर राष्ट्रवाद की भावना को और प्रबल किया। यही कारण है कि आज भी उनकी निष्ठा पार्टी के प्रति अटूट बनी हुई है।
1980 के दशक में जब भाजपा का गठन हुआ, तब माखनलाल जी को उत्तर बंगाल की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में पार्टी को पहुंचाया।
संगठन को दी नई मजबूती
इन इलाकों में उन्होंने बहुत कम समय में हजारों युवाओं और ग्रामीणों को भाजपा की विचारधारा से जोड़ने का काम किया। उनके कुशल नेतृत्व में संगठन ने जमीनी स्तर पर मजबूती पाई।
माखनलाल सरकार की संगठन क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लगातार सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष पद पर रहे। यह उनकी लोकप्रियता और कार्यकुशलता को दर्शाता है।
शपथ ग्रहण में उमड़ा जनसैलाब
शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत भी अभूतपूर्व रहा। वे एक खुले वाहन में सवार होकर मंच तक पहुंचे। उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और शुभेन्दु अधिकारी भी थे।
रास्ते भर समर्थकों ने उन पर फूलों की वर्षा की। 'जय श्री राम' के नारों से पूरा वातावरण उत्साह से भर गया। यह बंगाल के राजनीतिक इतिहास के लिए एक बड़ा बदलाव है।
माखनलाल जी जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं के कारण ही आज बंगाल में यह ऐतिहासिक परिवर्तन संभव हो सका है। - शुभेन्दु अधिकारी
भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
शुभेन्दु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बंगाल में विकास की नई उम्मीदें जगी हैं। उन्होंने मंच से जनता की सेवा करने और राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया।
माखनलाल सरकार जैसे पुराने नेताओं का अनुभव और शुभेन्दु अधिकारी का युवा जोश मिलकर बंगाल के नवनिर्माण में बड़ी भूमिका निभाएंगे। यह सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
ऐतिहासिक जीत का संदेश
समारोह के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने संदेश दिया कि भाजपा अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान करना कभी नहीं भूलती, चाहे वह सत्ता में हो या नहीं।
पश्चिम बंगाल में सत्ता का यह परिवर्तन केवल एक राजनीतिक घटना नहीं है। यह उन लाखों कार्यकर्ताओं के धैर्य की जीत है जिन्होंने दशकों तक संघर्ष किया। माखनलाल जी का सम्मान इसी संघर्ष का प्रतीक है।
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