राजस्थान

राजीविका: अब बनेंगी मिलियनेयर दीदी: राजस्थान में 'लखपति' के बाद अब 'मिलियनेयर दीदी' का लक्ष्य

जोगेन्द्र सिंह शेखावत · 07 मई 2026, 11:46 दोपहर
राजीविका की बैठक में मुख्य सचिव ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और बाजार विस्तार पर दिया जोर।

जयपुर | राजस्थान में ग्रामीण महिलाओं की किस्मत बदलने की तैयारी अब एक नए स्तर पर पहुंच गई है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राजीविका की बैठक में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए हैं।

शासन सचिवालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्य योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि राजीविका ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली महत्वपूर्ण पहल है।

वित्तीय अनुशासन की मिसाल: महिला निधि

मुख्य सचिव ने राजस्थान महिला निधि की सफलता पर विशेष खुशी जताई। उन्होंने बैठक में बताया कि 850 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरण के बाद भी एनपीए का 2 प्रतिशत से कम रहना एक बड़ी उपलब्धि है।

यह आंकड़ा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के अनुशासन और उनकी वित्तीय जिम्मेदारी का एक शानदार उदाहरण पेश करता है। उन्होंने इसे अन्य विभागों के लिए भी प्रेरणादायक बताया और वित्तीय मॉडल की सूक्ष्म मॉनिटरिंग पर बल दिया।

बाजार तक पहुंच और ब्रांडिंग पर जोर

अब स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को केवल स्थानीय मेलों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। मुख्य सचिव ने इन उत्पादों को मॉल्स, पर्यटन स्थलों और एयरपोर्ट जैसे व्यस्त स्थानों पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

 

"महिला नेतृत्व वाली आजीविका को बढ़ावा देने के लिए बाजार संपर्क विकसित करना और उत्पादों की दृश्यता बढ़ाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।"

 

लखपति से मिलियनेयर दीदी का सफर

राजस्थान में करीब 51 लाख महिलाओं को सशक्त करने का अभियान तेजी से जारी है। लखपति दीदी पहल के तहत लाभान्वित महिलाओं को अब निरंतर मार्गदर्शन दिया जाएगा ताकि वे अपनी आय को और अधिक बढ़ा सकें।

बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि अब लक्ष्य सिर्फ लखपति बनाना नहीं, बल्कि मिलियनेयर दीदी की दिशा में कदम बढ़ाना है। इसके लिए नई रणनीतियों और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण पर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए।

विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए नियमित बैठकों के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा और महिलाओं को सीधा लाभ मिल पाएगा।

इस पहल से न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि महिलाओं का सामाजिक स्तर भी काफी ऊंचा उठेगा। राजस्थान सरकार का यह कदम प्रदेश की आधी आबादी को आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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