जयपुर | राजस्थान की राजधानी जयपुर में लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान में देश के विभिन्न विधानमंडलों की समिति प्रणाली की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक हुई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की सभी विधानसभाओं की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित सात पीठासीन अधिकारियों की इस समिति ने मंगलवार को कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन मंथन किया।
समिति की दूसरी बैठक और प्रमुख उपस्थिति
समिति के सभापति और मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इसमें राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सहित कई राज्यों के अध्यक्षों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
बैठक में उत्तर प्रदेश के सतीश महाना, हिमाचल प्रदेश के कुलदीप सिंह पठानिया, ओडिशा की श्रीमती सूरमा पाढ़ी और सिक्किम के मिंगमा नोर्बू शेरपा मौजूद रहे। पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष इस बैठक में शामिल नहीं हो पाए।
यह इस उच्च स्तरीय समिति की दूसरी आधिकारिक बैठक थी। इससे पहले समिति की प्रथम बैठक मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित की गई थी, जहां शुरुआती सुधारों की रूपरेखा तैयार की गई थी।
राजस्थानी परंपरा से हुआ अतिथियों का भव्य स्वागत
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सभी आगंतुकों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्होंने सभी अध्यक्षों को राजस्थानी दुपट्टा ओढाकर और ऊंट की धातु की प्रतिकृति भेंट कर उनका भावपूर्ण अभिनंदन किया।
आए हुए अतिथिगण राजस्थान की सांस्कृतिक झलक देखकर पूरी तरह अभिभूत हो गए। सारंगी की मधुर धुन पर 'पधारो म्हारे देश' और कठपुतली कला के प्रदर्शन ने बैठक के माहौल को और भी खास बना दिया।
अतिथियों ने राजस्थान की प्रसिद्ध हस्तकला से निर्मित वस्तुओं का भी बारीकी से अवलोकन किया। देवनानी ने कहा कि राजस्थान की वीर धरा पर देश के विधायी दिग्गजों का स्वागत करना हमारे लिए गौरव की बात है।
समितियों को सशक्त बनाने पर हुआ विशेष जोर
वासुदेव देवनानी ने बैठक के पश्चात मीडिया से बात करते हुए बताया कि विधानमंडलों की समितियां वास्तव में सदन का लघु रूप होती हैं। इनकी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना समय की मांग है।
बैठक में विधायकों की भागीदारी बढ़ाने और समितियों द्वारा किए जाने वाले परीक्षणों की प्रक्रिया को समान बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। इससे पूरे देश में संसदीय कार्यप्रणाली में एक बड़ा सकारात्मक सुधार आएगा।
समिति का स्पष्ट मानना है कि समितियों की रिपोर्ट पर राज्य सरकारों द्वारा त्वरित और प्रभावी कार्यवाही की जानी चाहिए। साथ ही, इन प्रतिवेदनों पर सदन के भीतर भी चर्चा का पर्याप्त समय तय होना चाहिए।
लोकतंत्र की जीवंतताओं और परंपराओं को विकसित करने के लिए सभी विधानमंडलों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाया जाना आवश्यक है। समितियां आमजन को न्याय दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाती हैं।
जून में सौंपी जाएगी सुधारों की अंतिम रिपोर्ट
समिति ने अब तक देश के सभी राज्यों की विधानमंडल कार्यप्रणाली का विस्तृत अध्ययन पूरा कर लिया है। देवनानी ने संकेत दिए कि समितियों को और अधिक सक्रिय करने के लिए ठोस और नए कदम उठाए जाएंगे।
तय किया गया है कि यह उच्च स्तरीय समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट जून माह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप देगी। इस रिपोर्ट में विधायी सुधारों के लिए कई महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी अनुशंसाएं शामिल होंगी।
यदि आवश्यकता हुई, तो रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले एक और अंतिम बैठक आयोजित की जा सकती है। इससे सिफारिशों को अंतिम रूप देने में मदद मिलेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक समावेशी और पारदर्शी बनी रहेगी।
लोकतंत्र में संसद और विधानसभा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। संसदीय शोध में भी ये समितियां बहुत सहायक सिद्ध होती हैं। इनके सशक्त होने से शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता का विश्वास बढ़ेगा।
यह पहल भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली को आधुनिक और अधिक उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। जयपुर की इस बैठक ने भविष्य के बड़े विधायी सुधारों की मजबूत नींव रख दी है।
*Edit with Google AI Studio