बारां | मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर चीता केपी-3 अब राजस्थान के बारां जिले की सीमा में दाखिल हो चुका है। शनिवार को वह शेरगढ़ वाइल्डलाइफ अभयारण्य में पहुंच गया। वन विभाग के अनुसार, चीता पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में विचरण कर रहा है। रविवार को उसने परवन नदी के किनारे दो खरगोशों का शिकार किया।
बारां के शेरगढ़ पहुंचा चीता KP-3: कूनो नेशनल पार्क से बारां के शेरगढ़ पहुंचा चीता KP-3, दो खरगोशों का किया शिकार; वन विभाग की टीम कर रही मॉनिटरिंग
कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KP-3 अब राजस्थान के बारां जिले के शेरगढ़ वाइल्डलाइफ अभयारण्य पहुंच गया है। यहाँ उसने दो खरगोशों का शिकार किया है और वन विभाग की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है।
HIGHLIGHTS
- कूनो से निकला चीता KP-3 अब बारां के शेरगढ़ अभयारण्य में सुरक्षित पहुंच गया है।
- रविवार को चीते ने परवन नदी के किनारे दो खरगोशों का सफल शिकार किया।
- वन विभाग की टीमें 500 मीटर की दूरी से चीते की 24 घंटे मॉनिटरिंग कर रही हैं।
- विशेषज्ञों के अनुसार बारां के जंगल चीतों के बसने के लिए सबसे अनुकूल कॉरिडोर हैं।
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परवन नदी के पास बनाया ठिकाना
शेरगढ़ वाइल्डलाइफ के रेंजर जितेंद्र खटीक ने बताया कि चीता केपी-3 वर्तमान में नाहरिया ब्लॉक में सक्रिय है। वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है। वन विभाग की टीमें उसकी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं। टीम के सदस्य करीब 500 मीटर की दूरी से उसकी हर गतिविधि पर नज़र रख रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि शेरगढ़ पहुंचने से पहले भी यह चीता काफी सक्रिय था। उसने रास्ते में करीब 8 अलग-अलग शिकार किए थे।
शेरगढ़ है चीतों के लिए मुफीद
वाइल्ड लाइफ ऑफ इंडिया की टीम ने पहले ही शेरगढ़ को चीतों के लिए अनुकूल बताया था। यहाँ चीता बसाने की तैयारियाँ पहले से ही चल रही थीं। दिलचस्प बात यह है कि बिना किसी ट्रांसलोकेशन के, चीता खुद ही चलकर शेरगढ़ पहुंच गया है। यहाँ बोमा बनाने के लिए बजट भी जारी हो चुका है।
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प्राकृतिक कॉरिडोर का लाभ
एक्सपर्ट आर.एस. तोमर के अनुसार, बारां के जंगल कूनो, रणथंभौर और माधव टाइगर रिजर्व से सटे हुए हैं। यह एक प्राकृतिक कॉरिडोर बनाता है। कूनो में चीतों की संख्या 50 से अधिक हो गई है। ऐसे में वे नए क्षेत्रों की तलाश में बाहर निकल रहे हैं। केपी-3 भी अपनी नई टेरिटरी बना रहा है।
सुरक्षा और विकास की जरूरत
वन विशेषज्ञों का मानना है कि अब बारां के जंगलों को वाइल्डलाइफ के अनुसार और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है। चीता केपी-3 का यहाँ पहुंचना इस बात का संकेत है कि यहाँ का वातावरण उनके अनुकूल है। अब विभाग को इसकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। स्थानीय ग्रामीणों को भी चीते की मौजूदगी के बारे में जागरूक किया जा रहा है। परवन नदी का किनारा चीते के लिए पानी और शिकार दोनों की दृष्टि से उत्तम है।