नई दिल्ली | वैश्विक तेल बाजार में महीनों से जारी अस्थिरता के बाद एक बड़ी राहत देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते की खबर से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
पिछले कुछ समय से आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे। लेकिन अब बाजार का रुख बदल गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और एक व्यापक समझौते के लिए 60 दिनों की बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी है। इस खबर के बाद से ही तेल बाजार में बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है।
मई में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका ब्रेंट क्रूड अब 25 प्रतिशत से अधिक गिरकर 77 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है। आज ब्रेंट क्रूड की कीमत 79.46 डॉलर प्रति बैरल पर है, जबकि WTI क्रूड 75.60 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
भारत में लोग पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। जब कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे थे, तब देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.5 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई थी।
देश में आखिरी बार 25 मई को कीमतों में बदलाव हुआ था, जिसके बाद से दाम स्थिर हैं। अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें गिर रही हैं, तो उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही राहत देगी।
आपूर्ति की राह में अभी भी चुनौतियां
बाजार में यह धारणा है कि मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल जल्द ही वैश्विक बाजार में उपलब्ध होगा। हालांकि, कई विश्लेषक इस पर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर होने से आपूर्ति तत्काल सामान्य नहीं हो जाएगी। समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाने और बंद पड़े उत्पादन को फिर से शुरू करने में समय लगेगा।
इन चुनौतियों के कारण तेल की आपूर्ति को पूरी तरह से बहाल होने में वक्त लग सकता है, जिसका असर कीमतों पर भी दिख सकता है।
कुल मिलाकर, कच्चे तेल में गिरावट एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बड़ी कटौती की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में वैश्विक आपूर्ति की स्थिति और सरकार की नीतियां ही अंतिम दिशा तय करेंगी।
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