thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
तकनीक

मिशन मून: चंद्रयान-3 के चांद पर कदम रखने का काउंटडाउन शुरू, प्रोपल्शन मॉड्यूल से सफलता पूर्वक अलग हुआ लैंडर 

desk

चंद्रयान-3 के चांद पर लैंड करने का समय बेहद करीब आ चुका है और उसका काउंटडाउन शुरू हो चुका है।  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने चंद्रयान-3 के लैंडर को सफलतापूर्वक प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग कर दिया है।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • चंद्रयान-3 के चांद पर लैंड करने का समय बेहद करीब आ चुका है और उसका काउंटडाउन शुरू हो चुका है।  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने चंद्रयान-3 के लैंडर को सफलतापूर्वक प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग कर दिया है।
chandrayaan 3 countdown begins lander successfully separated from propulsion module
Chandrayaan-3

नई दिल्ली |  Chandrayaan-3 Mission Moon:  पिछले एक महीने से चंद्रयान-3 के चांद पर पहुंचने का इंतजार कर रहे देशवासियों के लिए अच्छी खबर है। 

चंद्रयान-3 के चांद पर लैंड करने का समय बेहद करीब आ चुका है और उसका काउंटडाउन शुरू हो चुका है। 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने चंद्रयान-3 के लैंडर को सफलतापूर्वक प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग कर दिया है।

अब शुरू हुई अकेले की यात्री

चंद्रयान-3 के लैंडर से प्रोपल्शन मॉड्यूल के अलग होने के साथ ही अब लैंडर की आगे की यात्रा अकेले ही शुरू हो गई है।

अब लैंडर अपने अहम और आखिरी पड़ाव पर पहुंच रहा है। अब आगामी 6 दिन में चांद की धरती पर उतर जाएगा। 
प्रोपल्शन मॉड्यूल भी देता रहेगा अहम जानकारियां

प्रोपल्शन मॉड्यूल भी लैंडर से अलग होने के बाद लगातार इसी धुरी पर घूमते हुए इसरो को पृथ्वी की कई अहम जानकारियां पहुंचाता रहेगा। 

चांद की सतह पर उतरते ही लेंगे सेल्फी

अगस्त में जब ये लैंडर ’विक्रम’ चांद की सतह पर उतरेगा तो उससे एक रैंप निकलेगा। 

जिससे लढ़कता हुआ रोवर ’प्रज्ञान’ बाहर आएगा। लैंडर और रोवर दोनों पर देश का तिरंगा चस्पा किया गया है। 

इसके बाद लैंडर और रोवर दोनों भारतीय तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी और एक दूसरे की तस्वीरें चांद से धरती पर भेजेंगे।

बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन सितंबर 2019 में भेजे गए चंद्रयान-2 का अनुवर्ती मिशन है, जिसके चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और घूमने की संपूर्ण क्षमता प्रदर्शित करने की उम्मीद है।

पिछली बार चंद्रयान-2 मिशन के दौरान लैंडर के ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ नहीं कर पाने के कारण सफलता नहीं मिल पाई थी।

शेयर करें: