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नीलू शेखावत की कलम से: बस शर्म

नीलू शेखावत

महिला को 'शक्ति-शक्ति' कहकर अकेला मत छोड़िये। कोई महिला कितनी भी ताकतवर हो, प्रकृति की जैविक संरचना का अतिक्रम नहीं कर पाएगी। शरीर से पुरुष, पुरुष ही रहेगा और स्त्री, स्त्री। जानवरों को समाज का हिस्सा बनाने का फल हम भुगत रहे हैं।

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HIGHLIGHTS

  • महिला को 'शक्ति-शक्ति' कहकर अकेला मत छोड़िये। कोई महिला कितनी भी ताकतवर हो, प्रकृति की जैविक संरचना का अतिक्रम नहीं कर पाएगी। शरीर से पुरुष, पुरुष ही रहेगा और स्त्री, स्त्री। जानवरों को समाज का हिस्सा बनाने का फल हम भुगत रहे हैं।
bas sharm by neelu shekhawat
Kolkata Rape and Murder Case

कोलकाता की डॉक्टर के साथ कैसा पाशविक कृत्य हुआ इस बारे में तो पिछले पाँच दिन से पूरा देश और दुनिया जान रहे हैं। इसलिए कैमरे की लाइट से दूर की बात करते हैं। मीडिया का अपना राग है जिससे उसका बाजार चलना है। 

पर इन सबसे अलग उस डॉक्टर के मित्र या शुभचिंतक पहले दिन से ही दबी जुबान कॉल्स, व्लॉग, वीडियो या अन्य माध्यमों से कह रहे हैं कि जो कुछ दिखाया जा रहा है वह झूठ है। उनका इशारा अस्पताल के अंदरखाने की ओर है।

जो चैट और कॉल्स वाइरल हो रही हैं वे भी इशारा करती हैं कि शायद वहशी अंदर से ही हों। इतना ही नहीं, घटना का समय, आरोपी और अंजाम भी वह हो जो जनता को सुनाई गयी कहानी से एकदम अलग हो। उनकी बात पर कोई गौर क्यों नहीं कर रहा? 

 एक झूठ को दबाने के लिए दूसरा झूठ, दूसरे को दबाने के लिए तीसरा, चौथा और मामला बिगड़ता देखकर भीड़ का हल्लाबोल! सबकुछ तोड़ताड़ कर, पौंछ पान्छकर फाइल सीबीआई को सौंपना और पार्टी पार्टी खेलना! खून सारा पानी हो गया? ये उन्हें गुंडा कह रहे हैं और वे इन्हें। असली गुंडों की पो बारह। पांच दिन से डॉक्टर सड़कों पर हैं और मरीज मरण शैया पर।

डॉक्टर्स की आशंका और डर भी वाजिब है। सोचिये, मेडिकल की पढाई में किशोर वय बलिकाएं आती हैं। यह पढाई इतनी सुलभ भी नहीं कि घर के बगल में कॉलेज मिल गया ।  मीलों दूर प्रशासन के भरोसे इन्हें मां बाप घरों से बाहर भेजते हैं।

जब एक परिपक्व महिला दर्दनाक तरीके से वहशीपन की शिकार हो जाती है तो उन किशोरियों की पीड़ा का अंदाजा लगाया जा सकता है। यदि ये जानवर अस्पताल से ही निकलते हैं, तब तो मंजर और भी खौफनाक है। 

महिला को 'शक्ति-शक्ति' कहकर अकेला मत छोड़िये। कोई महिला कितनी भी ताकतवर हो, प्रकृति की जैविक संरचना का अतिक्रम नहीं कर पाएगी। शरीर से पुरुष, पुरुष ही रहेगा और स्त्री, स्त्री। जानवरों को समाज का हिस्सा बनाने का फल हम भुगत रहे हैं।

वहाँ की सरकार और प्रशासन को ऐसे लोगों के प्रति संवेदना रखना बंद करना होगा। उस बिटिया की  बोटियों को नोचना बंद कर दीजिये। शर्म शर्म और शर्म! 

अपराधियों को शीघ्रातिशीघ्र सजा मिले, बेटियों को सुरक्षा मिले और बेटों को थोड़ी शर्म। 

- नीलू शेखावत

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