अयोध्या | अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर एक नया राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अरबों रुपये की श्रीराम शिलाओं के गायब होने का आरोप लगाते हुए इसे 'महापाप-महाघोटाला' करार दिया है। इस दावे ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है।
विपक्ष का 'महापाप-महाघोटाला' का आरोप
विपक्षी दल राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज, चंदे, चढ़ावे और जमीन से जुड़े मामलों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। यह विवाद अब सिर्फ वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आस्था से जुड़े प्रतीकों तक पहुंच गया है।
अखिलेश यादव ने उठाए गंभीर सवाल
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस मामले की गहरी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामला चढ़ावे से शुरू होकर चंदे और फिर जमीन तक पहुंचा। अब यह अरबों की श्रीराम शिलाओं के गायब होने तक आ गया है।
उन्होंने लिखा, "अयोध्या के इस ‘महापाप-महाघोटाले’ के पीछे कौन-सा सनातन विरोधी गिरोह काम कर रहा है, इसकी गहरी पड़ताल हो।"
सपा प्रमुख ने मांग की है कि इस मामले से जुड़े सभी लोगों की जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
कांग्रेस ने पीएम मोदी को घेरा
कांग्रेस ने इस मामले को एक 'संगठित लूट' बताते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि देश की आस्था के साथ छल किया गया है और धर्म के नाम पर सौदा हो रहा है।
कांग्रेस ने ट्रस्ट के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा का जिक्र किया, जो पीएम मोदी के प्रमुख सचिव रह चुके हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस कथित लूट के लिए प्रधानमंत्री सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
भाजपा के भीतर से भी उठी आवाजें
हैरानी की बात यह है कि भाजपा के कुछ नेताओं ने भी पारदर्शिता की मांग की है। पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने दान के दुरुपयोग की जानकारी होने की बात कही। वहीं, भाजपा नेता रजनीश सिंह ने पीएम को पत्र लिखकर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस बीच, बढ़ते विवाद को देखते हुए ट्रस्ट ने कहा है कि एसआईटी जांच से सभी तथ्य स्पष्ट हो जाएंगे। वहीं, भाजपा के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि बिना तथ्यों के किसी धार्मिक संस्था पर आरोप लगाना गलत है।
यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जांच की मांग तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि विपक्ष इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं है। सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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