देश और दुनिया में चर्चित अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से कथित धनराशि की चोरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इस प्रकरण की जांच अब विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में तीन बार शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
रोजाना 8 से 13 लाख रुपये तक पहुंचता है चढ़ावा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राम मंदिर परिसर में लगी करीब 35 दान पेटियों से प्राप्त चढ़ावे को प्रतिदिन एक सुरक्षित कक्ष में लाकर उसकी गिनती की जाती है। अनुमान है कि मंदिर को सामान्य दिनों में प्रतिदिन 8 से 13 लाख रुपये तक का चढ़ावा प्राप्त होता है। वहीं, ट्रस्ट के एक कर्मचारी के हवाले से बताया गया है कि विशेष अवसरों पर यह राशि 50 से 60 लाख रुपये तक भी पहुंच जाती है।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि कथित तौर पर करीब 200 करोड़ रुपये की चढ़ावे की राशि में अनियमितता या चोरी की आशंका जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक जांच जारी है और अभी तक किसी एजेंसी ने इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की है।
तहखाने में होती है चढ़ावे की गिनती
राम मंदिर के मुख्य परिसर से लगभग 200 मीटर दूर स्थित 'तीर्थयात्री सुविधा केंद्र' के तहखाने में चढ़ावे की गिनती की जाती है। मंदिर में प्रतिदिन लगभग एक लाख श्रद्धालुओं के आने के कारण गिनती की प्रक्रिया दो शिफ्टों में संचालित होती है—सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक। प्रत्येक शिफ्ट में करीब 20 कर्मचारी चढ़ावे की गिनती में लगे रहते हैं।
ट्रस्ट की निगरानी में होती है पूरी प्रक्रिया
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की निगरानी में दान पेटियों को कड़ी सुरक्षा के बीच गिनती कक्ष तक लाया जाता है। इसके बाद सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में दान पात्र खोले जाते हैं। गिनती की प्रक्रिया में ट्रस्ट के कर्मचारी, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के प्रतिनिधि तथा टीसीएस की ऑडिट टीम भी शामिल रहती है। नकदी की गिनती आधुनिक कैश काउंटिंग मशीनों से की जाती है और पूरी राशि का विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। इसके बाद धनराशि को मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है और अगले दिन बैंक में जमा कराया जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद उठ रहे सवाल
इतनी सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, बैंक प्रतिनिधियों और ऑडिट टीम की मौजूदगी के बावजूद कथित तौर पर इतनी बड़ी राशि की चोरी या अनियमितता की आशंका ने आम लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।