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गांधी पर पर्दा, CM का स्वागत!: गांधी बोले थे—‘बुरा मत देखो’, आबूराज नगर पालिका प्रशासन बोला—‘गांधी को ही मत देखो!’

गणपत सिंह मांडोली · 20 जून 2026, 04:57 दोपहर
CM के स्वागत में प्रशासन ने गांधी को ही 'कैद' कर दिया। टूटी प्रतिमा सुधारने के बजाय सफेद कपड़े से ढका।

आबूराज | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पहले आबूराज दौरे को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन इन तैयारियों के बीच नगर पालिका प्रशासन ने कुछ ऐसा किया, जिससे सब हैरान हैं। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को ही सफेद चादर में लपेट दिया है।

गांधी पर पर्दा, प्रशासन पर सवाल

जिस गांधी ने दुनिया को 'बुरा मत देखो' का संदेश दिया, आज उन्हीं की प्रतिमा को देखने से प्रशासन बच रहा है।

यह पूरा मामला नक्की झील के पास स्थित दांडी यात्रा की प्रतिमा से जुड़ा है।

यह प्रतिमा पिछले तीन सालों से बेहद खराब हालत में है। कभी इसका हाथ तोड़ दिया गया, तो कभी लाठी और चश्मा गायब हो गए।

नगर पालिका ने इसकी मरम्मत कराने की बजाय एक आसान रास्ता निकाला।

उन्होंने पूरी प्रतिमा को ही सफेद कपड़े से ढक दिया, ताकि न समस्या दिखे और न ही कोई जवाबदेही तय हो।

गांधी बोले थे—‘बुरा मत देखो’, आबूराज नगर पालिका प्रशासन बोला—‘गांधी को ही मत देखो!’

क्या मुख्यमंत्री से छिपाई जाएगी सच्चाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए नक्की झील पहुंचेंगे, तो क्या उन्हें यह सच्चाई दिखाई जाएगी?

क्या उनकी नजर सफेद चादर में लिपटी इस गांधी प्रतिमा पर पड़ेगी?

या फिर प्रशासन उन्हें किसी और रास्ते से ले जाकर इस शर्मनाक तस्वीर को छिपाने की कोशिश करेगा?

यह सिर्फ एक मूर्ति का अपमान नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता को दिखाता है जहां करोड़ों के आयोजनों के लिए पैसा है, लेकिन राष्ट्रपिता के सम्मान के लिए नहीं।

नगर पालिका पर किसका है 'कब्जा'?

स्थानीय लोगों में चर्चा है कि नगर पालिका में एक ऐसा प्रभावशाली कर्मचारी है, जो पूरे सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचाता है।

कहा तो यह भी जाता है कि उसके रसूख के आगे बड़े-बड़े अधिकारी भी बेबस नजर आते हैं।

लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि उसे तो शायद मुख्यमंत्री भी नहीं हटा सकते।

अगर इन बातों में सच्चाई नहीं है, तो प्रशासन को अपने काम से इसे साबित करना चाहिए और गांधी जी की प्रतिमा को सम्मान दिलाना चाहिए।

आबूराज की यह तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या गांधी जी को उनका सम्मान वापस मिलेगा, या वे इसी तरह वीआईपी दौरों के दौरान सफेद चादर में लिपटे रहेंगे? इसका जवाब प्रशासन को देना होगा।

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